धनतेरस पर ही क्यों मनाते हैं राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस, 2016 में हुई थी राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुरुआत

धनतेरस पर ही क्यों मनाते हैं राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस, 2016 में हुई थी राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुरुआत

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुरुआत साल 2016 में हुई थी राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस हर साल धन्वंतरी जयंती या धनतेरस के दिन मनाया जाता है राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुरुआत साल 2016 में हुई थी पहला आयुर्वेद दिवस 28 अक्टूबर 2018 को धनतेरस के दिन मनाया गया था इस साल देश तीसरा आयुर्वेद दिवस मना रहा है।

इस उपलक्ष्‍य में आयुष मंत्रालय ने नीति आयोग के साथ मिलकर नई दिल्‍ली में आयुर्वेद में उद्यमिता और व्‍यापार विकास पर एक संगोष्‍ठी का आयोजन किया है इसका उद्देश्‍य आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और उद्यमियों को कारोबार के नए अवसरों के प्रति जागरूक करना है बता दें कि आयुर्वेद सालों से हमारे अच्छे स्वास्थ्य में अपनी भूमिका निभाता आ रहा है ऐसे में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है

कौन है भगवान धन्वंतरी?

भगवान धन्वंतरी को भगवान विष्णु का रूप कहते हैं जिनकी चार भुजायें हैं उपर की दोंनों भुजाओं में शंख और चक्र धारण किये हुये हैं जबकि दो अन्य भुजाओं मे से एक में जलूका और औषध तथा दूसरे मे अमृत कलश लिये हुये हैं इनका प्रिय धातु पीतल माना जाता है इसीलिये धनतेरस को पीतल आदि के बर्तन खरीदने की परंपरा भी है इन्‍हे आयुर्वेद की चिकित्सा करनें वाले वैद्य आरोग्य का देवता कहते हैं इन्होंने ही अमृतमय औषधियों की खोज की थी।


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