बस्तर में बसे भोलेनाथ, जानें बस्तर के बीहड़ की अद्भुत कहानी!

बस्तर में बसे भोलेनाथ, जानें बस्तर के बीहड़ की अद्भुत कहानी!

महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसे स्थान के बारे में जिसमें है भगवान भोलेनाथ का वास। जी हां हम बात कर रहे हैं बस्तर के इलाकों की। जहां भगवान शिव का वास है और यह बस्तर के बीहड़ जंगलो में स्थित है। और यहां भोलेनाथ के  दर्शनों के लिए महाशिवरात्रि को हजारो श्रद्धालु नक्सलियों के इलाके में बेखौफ आस्था से कठिन डगर को चलकर हर साल पहुँचते है। पथरीली पगडण्डी, जंगलो से भरा रास्ता, कई नदियों नालो को पार कर शिव के भक्त दर्शनों को हजारो की संख्या में तुलार धाम पहुँचते है।

तुलार धाम पहुँचने के लिए दन्तेवाड़ा से 32 किलोमीटर बारसूर और बारसूर से 05 किलोमीटर बाईक से फिर मुचनार घाट तक पहुँचा जा सकता है। फिर 17 किलोमीटर पैदल कठिन पहाड़ो नदियों और घने जंगलों को 3 से 4 घण्टे का सफर तय कर तुलार गुफा तक पहुँचा जा सकता है। भक्तगण रास्तो की दिक्कतों की परवाह किये बिना इन्द्रावती नदी को पैदल पार कर, साइकलों और एक दूसरे के सहारे बाइको से रोमांच भरे सफर को तय कर दर्शनों के लिए पहुँचते है।

तुलार धाम में भोलेनाथ के दर्शनों को अंधे,लूले,लंगड़े बच्चे बूढ़े सभी बड़ी आस्था के साथ भगवान शिव के दर्शनों के लिए पहुँचते है। नक्सलियों के शहीद स्मारक इन इलाकों में रास्तो में साफ तौर पर दिखाई देते है। मगर डर और भय पर आस्था भारी पड़ती है। क्योकि मावोवादियो का यह अबूझमाड़ का इलाका पड़ता है। यहाँ नक्सली स्तम्भ खड़े दिखाई देते है। मतलब इन इलाकों में फोर्स की आमद शून्य दिखाई पड़ती है।

तुलार पहुंचने के बाद यहाँ की खूबसूरती, प्रकृति के बीच गुफा के अंदर स्थित शिवलिंग, शिवलिंग में प्रकृति द्वारा किया जाने वाला बारहमासी प्राकृतिक जलाभिषेक देखते ही बनता है। यहाँ की अनुपम प्राकृतिक खूबसूरती देख आपकी सारी थकान काफूर हो जाएगी। यहाँ पहुँच कर आपको ये लगने लगेगा कि, इस सृष्टि में अगर कहीं जन्नत है तो, वो यहीं हैं। तुलार की  वादियों में हैं। तुलार धाम में स्थित गुफा की लंबाई तकरीबन 70-80 मीटर लगभग होगा।  जिसका प्रवेश द्वार की ऊँचाई 20-25 मीटर होगी। पूरे गुफा में सिर्फ एक ही जगह पर 12 महीने चट्टानों से पानी रिसता रहता है उसी जगह पर स्थित है शिवलिंग। 

तुलार धाम पूरे बस्तर में एकलौती ऐसी जगह है जहाँ बारह महीने प्रकृति द्वारा शिवलिंग का जलाभिषेक होता है। ये किसी को भी नहीं पता की पानी आता कहाँ से है। यहाँ पहुँचने वाले श्रद्धालु इस पानी को बोतल में भरकर घर ले जाते हैं। और इन श्रद्धालुओं का ये मानना है कि, इस जल के उपयोग से शरीर में हड्डी के जोड़ों में होने वाला दर्द दूर होता है। और साथ ही इस जल के घर में छिड़काव से घर का शुद्दिकरण होता है। कई श्रद्धालु जो पिछले 10-15 सालों से विशेष मौकों पर यहां पहुँचते हैं उनका ये मानना है कि, तुलार में शिवलिंग पर जो जल रिसता है वो गंगा जल जैसा पवित्र है। ये जल पूरे साल भर भी बोतल में बंद करके रखा जाए तो, खराब नही होता।  

कई भक्तों का ये भी मानना है कि तुलार में स्थित शिव जी उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। साथ ही भोले बाबा निःसंतान दम्पत्तियों की मुरादें पूरी करते हैं और संतान की भी प्राप्ति होती है। पदयात्री अपने भोजन की सारी व्यवस्था लेकर घर से निकलते हैं। विशेष मौकों पर जंगल से लकड़ी बीनकर पत्थरों के चूल्हे बनाकर भोजन तैयार करते रास्ते भर आपको श्रद्धालुओं की भीड़ देखने मिल जायेगी। श्रद्धालु गुफा पहुँचकर रात्रि विश्राम करते हैं। सुबह उठकर, स्नान-ध्यान के बाद भगवान् भोलेनाथ के दर्शन कर घर लौटते हैं।
 


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