एकलव्य स्कूल में नहीं है शिक्षक, पढ़ाई हो रही प्रभावित

एकलव्य स्कूल में नहीं है शिक्षक, पढ़ाई हो रही प्रभावित

मुंगेली : अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों में सरकार की आवासीय एकलव्य स्कूल योजना मुंगेली में दम तोड़ती नजर आ रही है। वैसे तो जिले में एकमात्र स्कूल होने चाहिए, लेकिन मुंगेली में इसे दो भाग में बांट दिया गया है। शिक्षकों के आभाव में होनहार बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। पढ़ाई का आधा सत्र गुजर गया है, लेकिन बच्चों के कई विषय अभी तक खुले ही नहीं।

सरकार ने मुंगेली जिले में एक मात्र एकलव्य स्कूल खोला है।  सरकार की मंशा है कि आदिवासी और पिछड़ी जनजातियों के बच्चों के लिए बेहतर पढ़ाई की व्यवस्था हो सके। इसलिए इसे अनुसूचित जनजाति बाहुल्य इलाकों में संचालित कर रही है।

बच्चे एकलव्य स्कूल में एडमिशन पाने के लिए परीक्षा देकर इस स्कूल में प्रवेश पाते है। इस मंशा से यहां आते है कि वो यहां रहकर अच्छे से अपनी पढाई पूरी कर अपने मुकाम तक पहुंच पाए, लेकिन लचर व्यवस्था का शिकार होने से जिले का एकमात्र एकलव्य स्कूल भी नहीं बच सका।

यहां पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति ही की जा रही है। इस स्कूल में बच्चे तो है, लेकिन उनको पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है। जहां 3 शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए, वहां सिर्फ 1 ही शिक्षक पूरी विषयों की पढ़ाई करा रहा है।

यहां 3 विषयों की ही सिर्फ पढ़ाई होती है, बाकी विषयों को बच्चे खुद अपने स्तर से पढ़ रहे है। जितना उनको समझ में आता है, उतने की पढ़ाई कर रहे है। विडंबना इस बात की है कि एकलव्य स्कूल में 60 बच्चों की संख्या दर्ज है, लेकिन इन्हें 2 जगहों पर शिफ्ट किया गया है।

एकलव्य स्कूल के 30 छात्र को लोरमी के बालक छात्रावास में और 30 छात्राओं को लोरमी के ही बालिका आश्रम में रखा गया है, लेकिन दोनों ही जगह 1-1 शिक्षक होने से इनके पढ़ाई की स्थिति खराब है।

बच्चों का कहना है कि इससे पहले वो जिन स्कूलों में पढ़ रहे थे, उनकी स्थिति यहां से ज्यादा अच्छी थी। वो यहां आकर अपने आप को ठगा से महसूस कर रहे है। कई बार तो ऐसी स्थिति बनी की पालक उनको वापस लेने पहुंचे, लेकिन आश्वासन के झुनझुने से फिलहाल स्थिति रुकी हुई है।

जिले में जब स्कूल की स्वीकृति हुई थी, तब इसके लिए शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से स्कूल औपचारिक रूप से नाम मात्र के लिए संचालित हो रही थी, लेकिन अव्यवस्थाओं के अंबार से बच्चों का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। स्थानीय पार्षद, समाजिक नेता और अधीक्षिका बताते है कि कई बार ज्ञापन सौंपा गया है, लेकिन स्थिति जस के तस बनी हुई है।

हैरानी की बात यह है कि आधा सत्र निकल गया, लेकिन बच्चों के भोजन के लिए चावल का आबंटन अब तक प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे व्यवस्थाओं के तहत आश्रम में रखकर बच्चों को भोजन दिया जाता है, पर पढ़ाई शिक्षक के आभाव में पूरी तरह प्रभावित है।

इस बात की जानकारी जब जिले के कलेक्टर को दी गई, तो उन्होंने बताया कि 2 माह पूर्व ही उनके द्वारा एकलव्य स्कूल का दौरा किया गया था, तब उन्होंने वहां तत्काल शिक्षक भेजने के निर्देश दिए थे।

डीईओ ने 2 शिक्षकों की व्यवस्था भी की, लेकिन उन शिक्षकों के द्वारा जॉइन नहीं करने से उनका वेतन रोका गया है। वही मामला फिर से आने पर कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जिला प्रशासन के आदेशों का पालन नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जल्द ही शिक्षकों की व्यवस्थाओं का आश्वासन दिया गया है, साथ ही क्षेत्रीय विधायक तोखन साहू का कहना है कि शिक्षकों की व्यवस्था की गयी थी, लेकिन कुछ शिक्षक स्कूल ज्वाइन नहीं किये है, जल्द ही शिक्षकों की कमी को दूर किया जायेगा।

वहीं छात्रों के पालकों का कहना है कि बहुत उम्मीदों से अपने बच्चो को यहां प्रवेश दिलाये थे, लेकिन स्कूल खुले चार महीने हो गए है, यहां शिक्षकों की कमी अभी भी है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, अगर जल्द ही शिक्षक की व्यवस्था नहीं होती है, तो मजबूरन अपने बच्चों को वापस ले जाना पड़ेगा।

 


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