गांव की बेटियों ने उठाया बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा

गांव की बेटियों ने उठाया बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा

धमतरी : पूरे प्रदेश में हो रहे है शिक्षाकर्मियों की हड़ताल से स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से ठप्प हो गयी है। स्कूल में शिक्षक नहीं होने से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे है और अगर जा भी रहे है तो दिनभर खेलने में मशगूल है। इसी बीच धमतरी के एक गांव में अच्छी पहल देखने को मिल रही है।

यहां पढ़ी लिखी बेटियों ने बच्चों के भविष्य को देखकर पढ़ाने का जिम्मा उठाया है। जिले के दर्री ग्राम में 6 बेटियां स्वयं से प्रेरित होकर स्कूल में बच्चों को पढ़ाने पहुंच रही है। स्कूल में पढ़ाई होने से बच्चे भी काफी खुश है, साथ ही मन लगाकर पढ़ाई कर रहे है। वहीं गांव की बेटियों की इस पहल की पूरे गांव वाले सराहना कर रहे है, साथ ही उन्हें अपनी बेटियों पर नाज है।

दरअसल पूरे प्रदेशभर के शिक्षाकर्मी संविलियन की मांग को लेकर 20 नवंबर से हड़ताल पर बैठे हुए है। जिससे स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। स्कूल में शिक्षक नहीं होने से बच्चों का भविष्य अधर में लटक गई है।

जबकि कुछ महिने बाद ही परीक्षा शुरू होनी है। जिसे लेकर जिला प्रशासन ने एक अपील भी किया था कि गांव में जो भी पढ़े लिखे युवक-युवती है, वे अपनी सेवाएं स्कूलों में दे। ताकि बच्चों का भविष्य खराब न हो।

दर्री गांव के 6 बेटियों ने स्वप्रेरित होकर स्कूल में पढ़ाकर एक मिशाल पेश की है। दर्री में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में मिलाकर करीब 200 बच्चे है। स्कूल में पढ़ाने पहुंची बेटियों की माने, तो शिक्षकों के हड़ताल में चले जाने से पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। जिसे देख उन्हें बच्चों के भविष्य की चिंता हुई और स्कूल में जाकर पढ़ाने का फैसला लिया है।

बेटियों का कहना है कि स्कूल आकर पढ़ाने में उन्हें अच्छा लग रहा है और उनका समय भी व्यतीत हो रहा है, साथ ही बच्चों को अच्छी शिक्षा भी मिल रही है। बेटियों की इस पहल से गांव वाले तारीफ करते नहीं थक रहे है। बहरहाल जिला प्रशासन गांव के पढ़े लिखे युवक-युवतियों से स्कूलों में जाकर अपनी सेवा देने की अपील कर रहे है।  

 

 


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