नक्सलियों के शिकार से पीड़ित ग्रामीण, प्रशासन से कोई मदद नहीं

नक्सलियों के शिकार से पीड़ित ग्रामीण, प्रशासन से कोई मदद नहीं

जिले के नक्सलियों के शिकार सिर्फ पुलिस और सुरक्षाबल के जवान ही नही होते बल्कि इन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण भी नक्सलियों के आतंक का शिकार हुए है।

इन नक्सल पीड़ितों ने जब शासन प्रशासन से मदद मांगी तो उन्हें जिला मुख्यालय में लाकर बसा तो दिया गया है लेकिन उसके बाद कोई इनकी सुध लेने 12 सालो में कोई नही आया नक्सल पीड़ित परिवारों को रहने के लिए जो कालोनी बनाई गई है वो इस कदर जर्जर हो चुकी है कि उसके हिस्से एक-एक कर के गिर रहे है।

पिछली बरसात में घर की बालकनी का पूरा हिस्सा ही नीचे आ गिरा था जिससे एक पूरा परिवार 4 घण्टो तक दहशत में ऊपर फंसा रहा था  बारिश का मौसम आने में अब मात्र एक महीने का समय बचा है लेकिन इसके बाद भी नक्सल पीड़ितों की इस कालोनी में मरम्मत के लिए  ध्यान अब तक नही दिया जा रहा है।

नक्सल पीड़ित जान जोखिम में डाल इस कालोनी में रहने के लिए मजबूर है कोयलीबेड़ा क्षेत्र में सन 2003 में महेरसिंह नेगी जनपद सदस्य हुआ करते थे उस दौरान नक्सलियों का आतंक भी चरम पर था और महेरसिंह ने जब नक्सलियों के खिलाफ आवाज़ उठाई और क्षेत्र में विकास कार्य करवाना चाहा तो नक्सलियों ने उनका घर जला दिया और मारपीट कर गांव से ही भगा दिया जिसके बाद उनके पास ना तो जमीन बची है ना घर और 2005 से वो इस कालोनी में रह रहे है।

उनका कहना है कि एक तरफ शासन प्रशासन आत्म समर्पित नक्सलियों को तमाम सुविधा दे रही है उनके लिए योजनाए बनाई जा रही है और उन्ही नक्सलियों की यातना झलने वालो को इस कदर जान जोखिम में डाल जर्जर भवनों में रहना पड़ रहा है उन्होंने ने शासन प्रशासन से मांग की है कि नक्सल पीड़ित परिवारों को कम से कम रहने के लिए अच्छे मकान दिलाये जाए।

 


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