आरएसएस प्रमुख को बोलना पड़ गया महंगा, सेना पर की थी टिप्पणी!

आरएसएस प्रमुख को बोलना पड़ गया महंगा, सेना पर की थी टिप्पणी!

हाल ही में बिहार में आरएसएस कार्यकर्ताओं को मोहन भागवत ने संबोधित किया और कहा, कि संघ तीन दिन के भीतर अपने स्वयं सेवकों की सेना तैयार कर सकता है, जिसे तैयार करने में सेना को 6 से सात महीने लगते हैं। अब हुआ यूं कि विपक्ष ने सेना से जुड़ी टिप्पणी के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की कडी निंदा करनी शुरू कर दी और उन्हें देश से माफी मांगने के लिए कहा गया और इस बात पर अपना रूख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने स्पष्ट करने को कहा।

केरल सीएम पी विजयन ने भागवत की आलोचना करते हुए कहा कि आरएसएस भारत को मुसोलिनी का इटली और हिटलर के जर्मनी में तब्दील करना चाहता है। वहीं इस संबंध में पार्टी ने पीएम मोदी से कहा कि क्या वह देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरएसएस को देने के बारे में सोच रहे हैं। कांग्रेस ने भागवत के बयान के विरोध में देश भर में प्रदर्शन भी किए।

हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आज एक बयान में स्पष्ट किया कि भागवत ने भारतीय सेना और संघ के स्वयंसेवियों की तुलना नहीं की है और मुद्दे पर उनकी टिप्पणी को तोड़ मरोडक़र पेश किया गया है। यह हमारी क्षमता है। यदि देश को इस प्रकार की स्थिति का सामना करना पड़ा और संविधान की अनुमति हुई तो मोर्चा संभालने के लिए स्वयंसेवक तैयार रहेंगे। 

तृणमूल कांग्रेस ने मोहन भागवत और साथ ही उनका बचाव करने संबंधी ट्वीट को लेकर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजीजू पर हमला बोला और आरोप लगाया कि यह और भी स्पष्ट हो गया है कि सरकार को संघ रिमोट कंट्रोल से चला रहा है।

वहीं इस बारे में कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने आरएसएस प्रमुख का बयान चौंकाने  वाला और देश की जनता को विचलित करने वाला बताया। उन्होंने भारतीय सेना की तमाम उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि यह दुनिया की बड़ी सेनाओं में से एक है और यह बयान उसके मनोबल को तोडऩे वाला है।
 


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