उमा भारती उतरी संघ के समर्थन में!

उमा भारती उतरी संघ के समर्थन में!

हाल ही में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने दावा किया है कि आजादी के कुछ ही समय बाद ही जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर हमला बोल दिया था उस वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आरएसएस से मदद मांगी थी। उन्होेंने कहा कि आजादी के बाद कश्मीर के जो राजा थे महाराजा हरि सिंह, वह संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार नहीं ​थे। और शेख अब्दुल्ला ने हस्ताक्षर करने के लिए उनपर दबाव डाला और इसी के चलते नेहरू दुविधा में फंस गए थे।

फिर पाकिस्तान ने एकाएक हमला कर दिया और उसके सैनिक उधमपुर की तरफ बढ़ने लगे, उस समय नेहरूजी ने आरएसएस प्रमुख गुरू गोवलकर एवं आरएसएस के स्वयंसेवकों की मदद मांगी, जिसके बाद आरएसएस स्वयंसेवक मदद को जम्मू-कश्मीर गए थे।

आपको बता दें कि कुछ समय पहले मोहन भागवत ने एक टिप्पणी की ओर उसके चलते ऐसा हुआ। गौरतलब है कि बिहार में आरएसएस कार्यकर्ताओं को मोहन भागवत ने संबोधित किया था और कहा था कि संघ तीन दिन के भीतर अपने स्वयं सेवकों की सेना तैयार कर सकता है, जिसे तैयार करने में सेना को 6 से सात महीने लगते हैं। अब हुआ यूं कि विपक्ष ने सेना से जुड़ी टिप्पणी के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की कडी निंदा करनी शुरू कर दी और उन्हें देश से माफी मांगने के लिए कहा गया और इस बात पर अपना रूख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने स्पष्ट करने को कहा।

केरल सीएम पी विजयन ने भागवत की आलोचना करते हुए कहा कि आरएसएस भारत को मुसोलिनी का इटली और हिटलर के जर्मनी में तब्दील करना चाहता है। वहीं इस संबंध में पार्टी ने पीएम मोदी से कहा कि क्या वह देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरएसएस को देने के बारे में सोच रहे हैं। कांग्रेस ने भागवत के बयान के विरोध में देश भर में प्रदर्शन भी किए।

हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आज एक बयान में स्पष्ट किया कि भागवत ने भारतीय सेना और संघ के स्वयंसेवियों की तुलना नहीं की है और मुद्दे पर उनकी टिप्पणी को तोड़ मरोडक़र पेश किया गया है। यह हमारी क्षमता है। यदि देश को इस प्रकार की स्थिति का सामना करना पड़ा और संविधान की अनुमति हुई तो मोर्चा संभालने के लिए स्वयंसेवक तैयार रहेंगे। वहीं उमा के इस बयान को मुख्य तौर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सेना वाले बयान से जोड़ा जा रहा है

 


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