एक ऐसा गांव, जहां के युवाओं ने छोड़ दिया हंसना... जाने क्यों...

एक ऐसा गांव, जहां के युवाओं ने छोड़ दिया हंसना... जाने क्यों...

नीमच : जिले में एक ऐसा गांव हैं जहां के युवाओं ने शर्म के मारे एक दूसरे के सामने हसना ही बंद कर दिया। कारण हैं यहां का पानी। यहां का दूषित पानी पीने से समय से पहले ही लोग बूढ़े होने लगते हैं। लोगों के दांत झड़ने लगते हैं, बाल सफेद हो जाते हैं, छोटी उम्र में बच्चों के दांत पीले पड़ने लगते हैं और 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लोग बूढ़े नजर आने लगते हैं। 

इसको देखते हुए इस गांव में युवाओं की शादी समय पर नहीं हो रही हैं। लोग गांव से ही पलायन करने लगे हैं। पानी पीने से कई लोग अपंग हो गए हैं, तो कई असमय ही काल के गाल में समा गए हैं। इस समस्या का सामना ग्रामीण 25 सालों से कर रहे हैं, लेकिन सरकार इनके लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं करा सका। जिसे अब तक कई लोगों की मौत तक हो चुकी हैं।

मामला नीमच जिला मुख्यालय से महज 12  किलोमीटर दूर जावी गांव का हैं जहां रहने वाले परिवार पिछले 15 सालों से साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना हैं कि फ्लोराइड युक्त पानी के चलते न केवल उनके दांत पीले हो गए हैं, बल्कि अनेक रोग भी लग गए हैं। इस पानी को पीने से सबसे पहले लोगों के दांत पीले होते हैं और फिर कमर दर्द शुरू होता हैं। इसके बाद शरीर अकड़ना शुरू कर देता हैं और फिर इंसान की मौत हो जाती हैं। क्या बच्चे, क्या बड़े और क्या महिलाएं, क्या पुरूष सभी लोग इस पीड़ा से परेशान हैं।

जिसमें धीरे-धीरे लोग मौत की तरफ बढ़ रहे हैं। इस क्षेत्र में पानी का कोई भी साधन नहीं होने के कारण जिला प्रशासन द्वारा 4 हैंडपम्प लगाए गए थे। हैंडपम्प लगते ही यहां के ग्रामीणों के जीवन का काला अध्याय शुरू हो गया। हैंडपम्प लगवाने के बाद से ही गांव वालों की हालत खराब होने लगी। पानी की समस्या से तो लोगों को निजात मिल गई, लेकिन जो बोरिंग किए गए सभी से फ्लोराइड युक्त पानी निकलने लगा। जिसके लिए शासन ने लाखों रुपए खर्च कर फिल्टर प्लांट लगवाया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। आज भी यहां के लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। 

ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 25 साल से ग्रामीण इस समस्या को झेल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इलाज के लिए जब डॉक्टर का पास गए तो इलाज के दौरान पता चला की फ्लोराइड युक्त पानी पीने से फ्लोरसिस की बीमारी हो गई हैं। जिसमें व्यक्ति के शरीर की रीढ़ की हड्डी, गर्दन, पैर, हाथ की हड्डियां टेडी-मेढ़ी एवं अंत्यत कमजोर हो गई हैं। व्यक्ति के खड़ा होने, चलने, दौड़ने या बोझ उठाने में कठिनार्इ एवं पीड़ा होती हैं। दन्त फ्लोरोसिस मुख्यतः बच्चों की बीमारी हैं। फ्लोराइड युक्त पेयजल के लगातार इस्तेमाल से यह बीमारी आठ-नौ वर्ष की उम्र से दिखने लगती हैं।

इस बीमारी में बच्चों के स्थायी दांत गन्दे एवं क्षैतिज पीली धारी से युक्त दिखते हैं। गांव में पानी पीने के लिए 14 हैडपम्प और 4 कुएं हैं, लेकिन सभी में पानी फ्लोराइड की मात्रा अधिक हैं। पीएचई ने गांव के हैडपम्पों पर लाल रंग के निशान लगा दिए हैं। पानी का उपयोग नहीं करने की सलाह दी हैं। इस गांव के कई युवक अब तक कुवारें हैं। इस गांव की दशा देख कोई भी अपनी बेटी की शादी इस गांव में नहीं करना चाहता हैं। सरकार द्वारा विगत 25 सालों में शासन काल में कई योजनाओं का यहां क्रियान्वित किया कि ग्रामीणों को स्वच्छ और शुद्ध पेयजल पहुंच सके, पर हर योजना असफल रही। 70 प्रतिशत लोग फ्लोरोसिस बीमारी से पीड़ित हैं। 


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