6 माह के बच्चे को आया बुखार, तो नाना ने गर्म सरिए से दागा

6 माह के बच्चे को आया बुखार, तो नाना ने गर्म सरिए से दागा

रतलाम : बाल चिकित्सालय में छह माह के एक बच्चे को इलाज के नाम पर गर्म सरिए से दागने का मामला सामने आया है। जब बच्चे की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, तो उसकी मां उसे बाल चिकित्सालय लेकर आई। डॉक्टरों के द्वारा पूछने पर उसने बताया कि बच्चे को बुखार होने पर उसके नाना ने अंधविश्वास के चलते गरम सरिये से हाथ पैर सहित अन्य चार जगहों को दाग दिया।

पूरा मामला करवड़ गांव के पास ग्रामीण अंचल का है। जहां पर राहुल और अनिता डामोर के 6 माह के बेटे राहुल की तबीयत 2 महीने से खराब चल रही थी। कुछ दिन पहले बच्चे का रतलाम के बाल चिकित्सालय में उपचार भी हुआ था।

इसके पश्चात् जब बच्चे को पुनः बुखार आया, तो उसके नाना पप्पू लहसुनिया ने अंधविश्वास के चलते उसके दोनों हाथ, पैर और शरीर पर गर्म सरिये से दाग दिया। इसके बाद बच्चे की तबीयत ज्यादा खराब हो गई, तो उसका नाना और मां उसे बाल चिकित्सालय लेकर आए।

कुछ समय पश्चात् नाना बच्चे और मां को छोड़कर बाल चिकित्सालय से वापस चला गया। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे को बुखार है और उसे झटके भी आ रहे हैं। 14 अक्टूबर तक उसका इलाज बाल चिकित्सालय में चला था। उसके बाद उसे छुट्टी देकर डॉक्टरों ने इंदौर ले जाने को कहा था, लेकिन परिजनों ने लापरवाही बरती।

ग्रामीण अंचलों में अंधविश्वास के चलते बच्चे को नाना ने गर्म सरिए से दाग दिया। अक्सर बाल चिकित्सालय में इस प्रकार के केस आते रहते हैं और यही कारण निकलकर सामने आता है कि आदिवासी मानते हैं कि बच्चे को बुखार और झटके किसी बीमारी से नहीं, अन्य कारणों जैसे ऊपरी बाधा हवा आदि से आते हैं। वह बच्चों को डॉम लगा देते हैं।

उनका मानना है कि ऐसा करने से सारी व्याधियां दूर हो जाती है, परंतु यह परेशानी तो दूर नहीं होती। उल्टे बच्चों की जान पर बन आती है। इस प्रकार के अंधविश्वास का एक कारण यह भी है की ऐसा कृत्य करने वालों पर अक्सर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होती। जिसके चलते इस प्रकार का कार्य ग्रामीण अंचलों में बेखौफ किया जाता है और मासूमों की जान दांव पर लगा दी जाती है।

 


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