न बस्ते में किताब, न पहनने के लिए यूनिफार्म फिर भी स्कूल चले हम

न बस्ते में किताब, न पहनने के लिए यूनिफार्म फिर भी स्कूल चले हम

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है और स्कूलों में बच्चें पढ़ने के लिए अपनी दस्तक दे भी चुके है स्थानीय शिक्षा महकमा के अर्से पुराने लपारवाही के ढर्रे के बीच स्कूलों का संचालन अब प्रारंभ भी हो चुका है जहां खानापूर्ति के नाम पर स्कूलों में बच्चे तो पहुंचाए जा रहे हैं लेकिन उनके पास न तो पढ़ने के लिए पुस्तकें है न ही पहनने के लिए स्कूली यूनिफार्म बच्चे अब भी स्कूल पुरानी किताबे लेकर ही स्कूल पहुंच रहे हैं।

नही मिली बच्चो को यूनिफार्म

कक्षा 1 से लेकर कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक सत्र के दौरान स्कूली यूनिफार्म के नाम उनके पालकों के खातों में राशि जमा कराई जाती थी लेकिन पैसों के समुचित उपयोग न होने और महिलाओं को सशक्त करने के लिए नवाचार करते हुए स्व-सहायता समूहों के माध्यम से यूनिफार्म सिलवाने का निर्णय लिया गया था लेकिन न 2 अप्रैल को शुरू हुए सत्र में बच्चों को कपड़े मिल सके न ही फिलहाल अभी मिलने की उम्मीद है।

ब्लू जैकेट पहनने की अनिवार्यता

वही स्थानीय विभागीय अधिकारियों में असमंजस्य की स्थिति यह कि कौन और कब देगा स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक स्टाफ के लिए डेÑस कोड लागू कर पिछले दिनों खूब सुर्खियां बटोरी थी लेकिन यह नवाचार भी धरातल में आने से पहले फिस्स होता दिख रहा है महिला शिक्षकों के लिए मेहरून और पुरुषों के लिए नेवी ब्लू जैकेट पहनने की अनिवार्यता रखी गई थी लेकिन अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया क्या जैकेट विभाग देगा कि शिक्षकों को खुद अपनी जेब ढीली करनी होगी।

शाला की इमारत जर्जर

शिक्षा का नया सत्र प्रारंभ होने को है और जिले की समस्त शालाओं में प्रवेश उत्सव मनाये जा रहे है और शासन की योजनाओं से अवगत कराया जा रहा है लेकिन विडम्बना है कि सिवनी नगर मुख्यालय के मध्य स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस हॉयर सेकेण्डरी शाला एवं जिले की प्रथम बालक हिन्दी मेनबोर्ड प्राथमिक शाला के मध्य की इमारत जर्जर हो जाने के बावजूद भी ना तो जिला प्रशासन इस बिल्डिंग को गिरवाने की सुध ले रहा है और ना ही बनवाने की ऐसे में यहां पर सत्र प्रारंभ होने के दौरान बारिश में कोई भी हादसा होने से नही टाला जा सकता वहीं जिले ही नहीं वरन पूरे प्रदेश में स्कूल चलो अभियान का आगाज प्रशासन द्वारा किया गया था किन्तु यह अभियान उन स्कूलों तक ही सिमटकर रह गया जहां पर जिले के अधिकारी पहुंचे थे।

 


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