जहां है दो देवियों का वास, वह है देवास

जहां है दो देवियों का वास, वह है देवास

सुरेश जायसवाल - समुद्रतल से लगभग 8 हजार फीट की ऊंचाई पर है देवास। जहां पर माँ चामुण्डा देवी एवं माँ तुलजा भवानी का मंदिर है। यहां पर नवरात्रि में दूर-दूर से आने वाले भक्तों का तांता लग जाता है। देवास में स्थित टेकरी पर माता मंदिर की विशेषता यह है कि यहां माँ स्वयंभू प्रकट हुई है। यहां पर माता जी को स्थापित नहीं किया गया है और इसीलिए  माँ तुलजा भवानी और माँ चामुंडा के दर्शनार्थ बहुत दूर-दूर से भक्त गण आकर अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं। यहां पर महाराष्ट्र गुजरात तथा अन्य प्रदेशों से भक्तगण आकर माँ के दरबार में अपनी आराधना करते हैं।

माता अलग-अलग रूप  में भक्तों को दर्शन देती है

नौ  दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व में यहां पर भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन द्वारा संपूर्ण व्यवस्था की जाती है, किसी भी भक्त को कोई परेशानी ना हो यह इसका पूरा प्रयास यहां प्रशासन द्वारा किया जाता है।  टेकरी पर आज भी दक्षिण भाग में बाबा शीलनाथ की गुफा है जहां पर कई साधु-संत आज भी आते  हैं। पहली बार शीलनाथ बाबा की टेकरी पर रुके थे। माँ तुलजा भवानी और माँ चामुंडा दोनों बहने हैं यहां पर माताजी दिन में तीन बार रूप बदलती है दिन में तीन बार अलग-अलग रूप  में भक्तों को दर्शन देती है। माता टेकरी  दूर-दूर से लाखों की तादाद में भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। यहां पर सुबह और शाम दोनों समय आरती होती है जिसमें बड़ी तादाद में भक्तगण अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।

भक्त लेटते हुए घुटनों पर चलकर दरबार में आते है

माता के दरबार में भक्तगण अपने मनोकामना पूर्ण होने पर कई भक्त लेटते हुए तथा कई घुटनो के बल चलकर माता के दरबार में माता का शुकराना अदा करने मंदिर पहुंचते हैं। देवास स्थित माँ चामुंडा और तुलजा भवानी माता मंदिर दर्शन करने पहुंचने के लिए  इंदौर से देवास 35 किमी तथा उज्जैन से देवास 30 किमी दूरी पर है। तथा यहां इंदौर और उज्जैन से नियमित अंतराल पर उपलब्ध बस या ट्रेन के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है। तथा यहाँ पहुंचकर मंदिर के लिए रपट मार्ग  या सीढ़ी मार्ग के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।

श्रद्धालुओं को  20 रुपये में भरपेट भोजन

अब देवास की सुंदरता का आनंद लेते हुए रोपवे के माध्यम से पहुंचना भी कम  रोमांचक नहीं है। प्रत्येक केबिन में  6-6 भक्तों को बैठाकर ऊपर जाया जा सकता है। नवरात्रि त्यौहार के दौरान  सैकड़ों भक्त इंदौर या अन्य स्थानों से देवास की यात्रा करते हैं। वे  नंगे पैर की यात्रा  बिना  जूते पहने इतनी लंबी दूरी तक चलने का दर्द सहन करते हैं। केवल देवी के आशीर्वाद मांगने के लिये। अभी पिछले कुछ वर्षों से देवास प्रशासन द्वारा यहां अन्नक्षेत्र खोला गया है जिसमें  बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को  20 रुपये में भरपेट भोजन कराया जाता है।

 

 


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