इस गांव में हैं खंडहर घर और वीरान भवन, लोग कर रहे पलायन

इस गांव में हैं खंडहर घर और वीरान भवन, लोग कर रहे पलायन

श्योपुर। प्रदेश सरकार या केन्द्र सरकार विकास के चाहे लाख दावे करें, लेकिन कई ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जहां विकास के दावे गलत साबित हो रहे हैं। नतीजा यह निकलता है कि पूरा गांव त्रस्त होकर पलायन करने को मजबूर हो जाता है।

विकास के कदम नहीं पहुंचे गांव में...

ऐेसा ही एक मामला श्योपुर में भी सामने आया है, जहां पूरा गांव ही पलायन कर गया और अब यहां खंडहर बन चुके घर और वीरान सरकारी भवनों के अलावा कुछ नजर नहीं आता हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं श्योपुर से खातौली मार्ग पर प्रेमसर से ननावद की और जाते रोड पर बसे ग्राम बाला का टपरा की। इस गांव में कुछ वर्षों पूर्व जहां हंसती खेलती जिंदगी नजर आती थी, साथ ही सरकारी स्कूल और आंगनबाडी खुली थी, लेकिन सरकार के विकास के कदम यहां किसी भी तरीके से पहुंच ही नहीं पाए।

26 बच्चों ने स्कूल आना किया बंद...

गांव में रहने वाले अनुसूचित जाति वर्ग के 100 लोगों के परिवार अपने बीबी-बच्चों व परिजन के साथ अब यहां से पलायन कर गए हैं। स्कूल में दर्ज 26 बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया तो इस संबंध में वहां पदस्थ दो शिक्षकों ने भी अपने आला अधिकारियों को इस बात से अवगत नहीं कराया।

हाल हैं बेहाल...

गांव में ना ही बिजली है, ना ही पानी और ना ही सड़क। ऐसी स्थिति में यहां जिंदगी बसर करना बेहद कठिन सा लगता है।  हमने जब गांव के चारों ओर घूमकर देखा तो यहां के हालात बेहद खराब निकले और वीरान घर तथा सुनसान सरकारी आवासों में बर्षों से कोई आहट नहीं होना, जिससे निश्चित ही सरकार की नजरअंदाजी साफ नजर आती है। वहीं कलेक्टर का  कहना है, की ऐसी कोई शिकायत नहीं है, फिर भी मामले को दिखवाया जायेगा।  

 


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