नवरात्रि के तीसरे दिन माता चन्द्रघंटा की शक्ति के रूप में की जाती है पूजा

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चन्द्रघंटा की शक्ति के रूप में की जाती है पूजा

गब्बर सिंह ठाकुर : शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन माता चन्द्रघंटा के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरो में पहुंचे। शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। आज माता रानी के नौ रूपों में से तीसरा दिन माता चन्द्रघंटा के रूप से उपासना कि जाती है माता चन्द्रघंटा शान्ति और शक्ति के रूप में पूजा जाता है जो भक्त माता चन्द्रघंटा कि आराधना करते है।

माता उन को और परिवार को शांति और शक्ति प्रदान करती है, दुर्गा का तीसरा रूप चंद्रघंटा है इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है और इनके दस हाथ हैं चंद्रघंटा मां दुर्गा का तीसरा रूप है इसका अर्थ है चंद्रमा के आकार वाले घंटे को धारण करने वाली। वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं सिंह पर सवार दुष्‍टों के संहार के लिए हमेशा तैयार रहती हैं इनके घंटे सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस कांपते रहते हैं देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है।


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