Aug 31, 2018
सुरेंद्र जैन - ओधोगिक इकाइयों के बढ़ता प्रदूषण सिर्फ ऊपरी हवा को ही प्रदूषित नही कर रहा बल्कि ग्रामीण अंचलों में भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है इसका जीता जागता प्रमाण है उरला अछोली ओधोगिक क्षेत्र से लगा गांव कन्हेरा सांकरा सिलतरा से पठारीडीह मार्ग पर स्थित ग्राम कन्हेरा से उरला सरोरा तक बड़ी संख्या में छोटी बड़ी ओधोगिक इकाइयां स्थापित है जिनके प्रदूषण से ग्रामीण हमेशा हलाकान रहते है कन्हेरा ग्राम पंचायत के उपसरपंच तथा ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि उनके गांव में आठ नो बोर है पहले तो सबमे पानी ठीक स्वछ मीठा आता था लेकिन बीते कुछ सालों से गांव के सभी जलस्रोतों का पानी पीने लायक नही रह गया है।
आयरन युक्त पानी आने से परेशान लोग
बता दें की इस बारे में कई बार शिकायत की लेकिन नतीजा कुछ नही निकला शासकीय स्कूल के प्रभारी ने बताया कि समीप में ही स्थित कुछ फेक्ट्रियो का केमिकल युक्त पानी जमीन के अंदर जाने से स्कूल के हेण्डपम्प का पानी भी खराब हो गया इसके बाद उक्त हेण्डपम्प को बन्द कर दिया है ग्रामीण स्कूली बच्चों को अन्यत्र से पीने का पानी मंगाया जाता है इधर गुरुवार को कन्हरा से तीन किलो मीटर दूर स्थित ग्राम कुम्हारी में पीएचई धमतरी की बोरिंग मशीन से एक बोर किया गया है खुशी की बात यह है कि बोर सफल रहा और पानी स्वच्छ व मीठा निकला।
पड़ोसी गांव के ऊपर निर्भर ग्रामीण
बोर के सम्बंध में बोर मशीन कर्मी ओर कुम्हारी के सरपंच ने बताया कि कुम्हारी की शासकीय भूमि पर जो बोर किया गया है वह ग्राम कन्हरा में पाइपलाइन से पेयजल पहुंचाने हेतु किया गया है हम आपको बता दें कि ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक देवजीभाई पतेल को भी अपनी समस्या से अवगत कराया था तब विधायक पटेल की पहल पर कुम्हारी में बोर किया गया है ताकि तीन किलो मीटर दूर कन्हरा के ग्रामीणों को स्वछ मीठा पेयजल मिल सके लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या फेक्ट्रियो के बढ़ते प्रदूषण के कारण गांव के भूजल का इतना प्रदूषित होने उचित है कि ग्रामीणों को पड़ोसी गांव के ऊपर निर्भर होना पड़े।








