Oct 19, 2016
चांद की खूबसूरती पर कई कवियों ने अपने खाली पन्नों को अपनी भावनाओं से सजाया है। हर पति के दिल में हमेशा अपनी पत्नी की तस्वीर चांद की तरह ही खूबसूरत होती है। आज सुहागन महिलाओं का महापर्व करवा चौथ है। इस दिन पत्नियां अपने पति के लंबी उम्र और स्वस्थ्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं। रात को जब चांद निकलता है तो चंद्र पूजा की जाती है फिर पति की पूजा का विधान है। आज हम आपको बता रहे हैं करवा चौथ व्रत और पूजन से जुड़े कुछ खास टिप्स।
पूजा करने का शुभ मुहूर्त 05:43 से 06 बजकर 50 मिनट तक
आज के करवा चौथ की पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 43 और 46 मिनट से लेकर 06 बजकर 50 मिनट तक का है। करवा चौथ के दिन चन्द्र को अर्घ्य देने का समय रात्रि 08.50 बजे है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ ही महिलाएं शिव, पार्वती, कार्तिकेय और गणेश की आराधना भी करें। महिलाएं खास ध्यान रखें कि चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करें। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास को दी जाती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- एक पाटा धोकर शुद्ध करें ।
- इस पर कुछ गेहूं के दाने रखें ।
- अब इस पर पूजा के लिए चौथ माता का पाना रखें ।
- एक मिट्टी के करवे पर मौली बांधकर रोली से एक सातिया बनाएँ ।
- उस पर रोली से तेरह बिंदी लगाकर चाँद को अर्ध्य देने के लिए जल भर दें ।
- उस पर एक खाली दीपक या प्लेट रखकर उसमें दो बोर , एक कांचरी , दो चोले की फली , आंवला , सिंघाड़ा , एक फूल , आदि रखें ।
- फिर एक दूसरी प्लेट में रोली , मौली , गेहूं के दाने , गुड़ , मेहंदी लें और एक लोटा जल से भरकर रखें ।
- लोटे पर मोली बांधकर सातिया बनाएँ ।
- चौथ माता को रोली , मोली , अक्षत , फूल , मेहंदी आदि अर्पित करके पूजा करें और गुड़ का भोग लगाएं ।
- अपने माथे पर रोली से टीकी करें ।
- हाथ में गेहूं के तेरह दाने लेकर करवा चौथ की कहानी सुनें । करवा चौथ की कहानी जानने के लिए।
- विनायक जी की कहानी सुने ।
- कहानी सुनने के बाद गेहूं के कुछ दाने लोटे में डाल दें । कुछ दाने साड़ी के पल्लू में बांध लें ।
- पल्लू में बंधे हुए गेहूं के दाने रात में चाँद को अर्ध्य देते समय हाथ में रखते है।
- लोटे का जल सूरज को देते है ।
- एक थाली में फल , मिठाई आदि रखते है और शक्कर के करवे में चावल भरते है इसे भी थाली में रखते है , कुछ रूपये रखकर
- इसे बायना के तौर पर सासु , ननद या जेठानी को देते है ।
चाँद निकलने पर क्या करें
रात को चाँद निकलने पर चाँद की पूजा करने के बाद ही व्रत खोला जाता है। चाँद निकलने पर चाँद को अर्क दिया जाता है , उसकी पूजा की जाती है। चाँद को जाली में से या दुपट्टे में से देखते है । फिर इसी तरह पति को भी देखते है । इसके बाद पति अपनी पत्नी को थाली से जल का लोटा उठाकर उससे पहला घूंट पानी का पिलाता है। और खाने के लिए पहला निवाला देकर व्रत खुलवाता है। इसके बाद व्रत करने वाली महिला भोजन करती है। आजकल पति भी पत्नी का साथ देते हुए इस दिन व्रत रखने लगे है। पति का व्रत रखना पत्नी के प्रति प्रेम जाहिर करता है। इससे पति पत्नी का आपसी प्रेम और विश्वास बढ़ता है । यह पति पत्नी के रिश्ते को और मजबूत करता है।








