विदिशाः आज भी निकलती है भगवान श्रीराम जी की बारात, 119 वर्षो से होता आया है श्रीराम लीला और मेला का आयोजन

विदिशाः आज भी निकलती है भगवान श्रीराम जी की बारात, 119 वर्षो से होता आया है श्रीराम लीला और मेला का आयोजन

दिपेश शाह - ऐतिहासिक, धार्मिक नगरी विदिशा में आज भी निकलती है भगवान श्रीराम जी की बारात। अंग्रेज सरकार भी इस आयोजन को रोक नहीं पाये। विदिशा की श्रीरामलीला का चलित मंचन या तो दिल्ली में दिखाई देता है या फिर विदिशा में। यहां 119 वर्षो से श्रीरामलीला और मेला का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी से शुरू होने वाली श्रीरामलीला के इस ऐतिहासिक आठवें दिन भगवान श्रीराम ने लीला में शिवधनुष को तोड़ा और निकल पड़े अपनी सीता से विवाह रचाने के लिए।

सब कुछ कुछ घंटों के लिए ठहर सा जाता है, जब बारात सडकों से है गुजरती

विदिशा में सब कुछ कुछ घंटों के लिए ठहर सा जाता है जब ऐतिहासिक राम बारात सडकों से गुजरती है। आज भी ऐसा ही हुआ, जब दूल्हा बने श्रीराम अपने भ्राता लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न संग घोडे पर सवार हो कर मुख्य मार्ग पर निकले। इन चारों रघुवंश कुमारों के साथ रथों में सवार महाराज दशरथ, गुरू वशिष्ठ, पालकी में ऋषि, मुनि, विद्वान, राजे महाराजे सब बाराती बन चल रहे थे। सड़कों पर लोग पुष्पवर्षा कर रहे थे। स्टेशन माधवगंज से शुरु हुई रामबारात तीन किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए श्रीरामलीला प्रांगण में संपन्न हुई। गंगा-जमुनी तहजीब की मिशाल बनी इस राम बारात में शहर के सारे बैंड शामिल हुए तथा रईस अहमद, अनीस अहमद, नफीस अहमद, रफीक अहमद ने अपनी जादुई आवाज से भगवान श्रीराम के भजन भी गाये।

 


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