खुले आसमान के नीचे दुकान लगाने को मजबूर

खुले आसमान के नीचे दुकान लगाने को मजबूर

राजनांदगांव : डोंगरगढ़ में ऊपर मन्दिर परिसर में 5 मई को हुए आगजनी से प्रभावित दुकानदारों को दुकान बना कर नही दिए जाने से दुकानदार सीढ़ियों पर दुकान लगाने के लिए मजबूर हैं। परिवार चलाने, स्कूल फीस के लिए पैसे नही हैं। दुकानदार बाहर जाकर मजदूरी करने को मजबूर हो गए हैं।

डोंगरगढ़ में 5 मई को ऊपर मां बम्लेश्वरी माता के मन्दिर जाने के रास्ते पर बने दुकानों में आग लगने से 49 दुकान जलकर राख हो गयी थी और 16 दुकाने प्रभावित हुई थी। घटना को दो माह से ज्यादा हो गये, पर प्रशासन दुकान बनाने में नाकाम हो गया। जिससे दुकानदार बांस से झिल्ली का सहारा लेकर, तो कुछ सीढ़ियों पर दुकान लगाने को मजबूर हैं।

15 दिन में दुकानदारों को दुकान बनाकर देने का दावा शासन प्रशासन ने किया था, लेकिन दुकान बनाने का जिम्मा मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट ने लिया था, पर ट्रस्ट द्वारा दुकान बनाने की मानसिकता नजर नही आ रही हैं।

शासन प्रशासन सहित जिले के सांसद व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पुत्र अभिषेक सिंह ने हादसे को लेकर तेवर दिखा तुरंत दुकानदारों को मुआवजा दे कर आगजनी से निपटने का प्रयास किया और जल्द उसी जगह पर नए दुकान बनाने का वादा किया था। उससे दुकानदारों को कुछ अच्छा होने की उम्मीद थी, पर समय बीतने के बाद अब इन 65 दुकानदारों को पूछने वाला कोई नहीं। जिसके कारण आज दुकानदार दो वक्त की रोटी और बच्चों के पढ़ाई के लिए खुले में दुकान लगाने व बाहर मजदूरी करने को मजबूर हो गए हैं। वही बारिश में सामान खराब होने का खतरा बना हैं। हादसे में लाखों का नुकसान हुए दुकानदारों का कहना हैं कि शासन ने जो 20 हजार मुआवजा दिया हैं, उससे आग में हुए नुकसान की पूर्ति नही हो सकती।


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