Oct 19, 2016
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के नए आदेश ने काली कमाई करने वाले भ्रष्ट अफसरों की चिंता बढ़ा दी है। इओडब्लू ने संबंधित विभागों से अभियोजन चलाने की अनुमाती मांगी है। शासन नेे सभी विभागों से अभियोजन स्वीकृति सबंधी प्रकरणों में तत्परता लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव विवेक ढांड ने राज्य शासन के सभी विभाग के प्रमुखों को पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांतों के अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं। केन्द्रीय सतर्कता आयोग ने जारी किए आदेशों के अनुरूप अभियोजन स्वीकृति संबंधी प्रकरणों में तत्परता सुनिश्चित करने के लिए कहा है। आयोग के आदेश की कॉपी सभी विभागों को भेज दी गई हैं।
आयोग के आदेशों में अभियोजन स्वीकृतिकर्ता सक्षम प्राधिकारी के निर्णय लेने के दायरे को स्पष्ट किया गया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो के मुताबिक राज्य सरकार, भ्रष्टाचार के गंभीर आपराधिक प्रकरणों की सूक्ष्मता से विवेचना होने के बाद ही अभियोजन चला सकती है। आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकाारियों के खिलाफ पीसी एक्ट की धारा 19 के तहत सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता होती है।
दरअसल, राज्य शासन के कुछ विभाग अभियोजन स्वीकृति प्रदान करने में अधिक विलंब कर रहे हैं। इसके कारण भ्रष्टाचार के प्रकरण लंबे समय से विभागों में ही लंबित हैं। जबकि अभियोजन स्वीकृति प्राप्त होने पर ही ईओडब्ल्यू व एसीबी में समय पर चालान पेश कर ट्रायल की प्रक्रिया प्रारंभ हो पाएगी। ईओडब्ल्यू व एसीबी ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत विनीत नारायण विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया, डॉ. सुब्रमणियम स्वामी विरूद्ध डॉ. मनमोहन सिंह व अन्य का हवाला दिया गया है। इसमें अभियोजन स्वीकृति के लिए सक्षम प्राधिकारी पर समय-सीमा का बंधन रखा गया है। न्यायदृष्टांत में स्पष्ट किया गया है कि अभियोजन स्वीकृति देना एक प्रशासनिक कार्य है। उसमें यह भी स्पष्ट है कि अभियोजन स्वीकृतकर्ता प्राधिकार के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं।प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर अभियोजन स्वीकृति देने या न देने का निर्धारण किया जाता है। बाकि किसी दस्तावेज को विचारण में नहीं लिया जा सकता और न ही आरोपी के किसी भी अभ्यावेदन पर विचार किया जा सकता है।
भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ एसीबी और ईओडब्ल्यू ने छापामार कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपी अफसर-कर्मियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। एसीबी और ईओडब्ल्यू में अलग-अलग विभाग के अफसर-कर्मियों के खिलाफ दो सौ से अधिक मामले लंबित हैं। कई मामले में अभी तक चालान भी पेश नहीं किया गया है। पिछले नौ वर्षों में एसीबी ने करीब चार सौ अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा है। सौ से अधिक भ्रष्ट अफसरों के घरों में छापामार कार्रवाई भी की है। छत्तीसगढ़ के 45 आईएएस अफसरों खिलाफ भी शिकायतें लंबित हैं।इनमें से दो अफसरों के खिलाफ ईओडब्ल्यू व एसीबी में प्रकरण दर्ज है। जबकि तीन अफसरों के परिवार पर एनजीओ संचालित करने की शिकायत है। एसीबी व ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में चार सौ करोड़ रुपए से अधिक की काली कमाई उजागर हो चुकी है। प्रदेश में अब भ्रष्ट अफसर-कर्मियों की संपत्ति कुर्क करने के लिए छत्तीसगढ़ विशेष न्यायालय अधिनियम 2015 भी प्रभावशील हो गया है। इसमें भ्रष्ट तरीके से अर्जित संपत्ति को राजसात करने का प्रावधान भी रखा गया है।








