कैशलेस की ओर तेजी से बढ़ता प्रदेश

कैशलेस की ओर तेजी से बढ़ता प्रदेश

लोकेन्द्र सिंह
विमुद्रीकरण (नोटबंदी) के साहसिक निर्णय के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में भ्रष्टाचार खत्म करने और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए नकदविहीन (कैशलेस) लेनदेन का आह्वान किया है। देशहित में प्रधानमंत्री के नोटबंदी के निर्णय और नकदविहीन लेनदेन के आह्वान का स्वागत मध्यप्रदेश की जनता और सरकार, दोनों ने खुले दिल से किया है। केंद्र सरकार के प्रत्येक लोक कल्याणकारी कदम के साथ मध्यप्रदेश ने आगे बढ़कर कदम मिलाया है। मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया से लेकर नोटबंदी और कैशलेस तक के निर्णय को प्रदेश सरकार सकारात्मक ढंग से जनता तक लेकर गयी और जनता ने सरकार की नीयत पर भरोसा करके उसके प्रयासों पर अपनी सहमति की मुहर लगाई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आह्वान पर प्रदेश की जनता ने नोटबंदी के निर्णय को भी भरपूर समर्थन दिया है। जिस तरह देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है, उसी तरह प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ है। जनता दोनों राजनेताओं पर भरोसा करती है। इसलिए अपने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का साथ जनता ने बेहिचक दिया है। इसका परिणाम यह रहा कि प्रदेश के किसी भी कोने से अप्रिय घटनाओं की अधिक खबरें नहीं आयी हैं।

जनता के उत्साह और सरकार के प्रबंधन के कारण मध्यप्रदेश में नोटबंदी के बाद के 50 दिन बड़ी सहजता और आसानी से बीत गए। मध्यप्रदेश के किसी भी जिले की जनता को नोटबंदी के कारण अधिक असुविधा नहीं उठानी पड़ी। दरअसल, लोगों ने बहुत सूझबूझ से काम लिया। ज्यादातर जगह लोगों ने पहले दिन से ही समझदारी दिखाते हुए थोड़ा समय बीतने का इंतजार किया। लोग एक साथ एटीएम और बैंकों पर नहीं टूटे। इससे बैंकों में भीड़
दिखाई नहीं दी। लोग आसानी के साथ बैंकों से एक हजार और पाँच सौ के नोट बदलवा सके। मध्यप्रदेश में एटीएम पर भी लम्बी कतारें कम ही देखने को मिलीं। केंद्र सरकार के नोटबंदी के निर्णय का मध्यप्रदेश की जनता ने दिल से स्वागत किया, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है उपचुनाव में मिली जीत। नोटबंदी के वातावरण में 19 नवंबर को मध्यप्रदेश में नेपानगर विधानसभा सीट और शहडोल की लोकसभा सीट पर मतदान हुआ था, जिसके परिणाम प्रदेश सरकार के पक्ष में आए। जबकि राजनीति और मीडिया से लेकर बुद्धिजीवियों का एक धड़ा यह मान रहा था कि इन उपचुनावों में जनता सत्तारुढ़ भाजपा को सबक सिखाएगी। अपने मत का उपयोग कर जनता बताएगी कि उसे नोटबंदी का निर्णय बिल्कुल पसंद नहीं आया है और यह भी कि नोटबंदी का निर्णय गलत है। बहरहाल, यहाँ प्रश्न यह भी उठता है कि बाकि राज्यों के मुकाबले मध्यप्रदेश में नोटबंदी सहजता से कैसे सम्पन्न हो गई।

इसका सबसे पहला और सटीक जवाब तो जनता का समर्थन और सहयोग ही है। लेकिन, एक दूसरा कारण और भी है, जिसके कारण प्रदेश में नोटबंदी की प्रक्रिया में लोगों को असुविधा नहीं हुई। दरअसल, मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार नवाचारों का स्वागत करने के लिए प्रवृत्त है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और पारदर्शिता लाने के लिए भले ही कैशलेस का सिद्धांत नोटबंदी के निर्णय के बाद दिया हो, लेकिन मध्यप्रदेश में पहले से ही कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दिया जा रहा था। सरकार के ज्यादातर लेनदेन कैशलेस होना प्रारंभ हो गए थे। सरकार के एक दावे के मुताबिक मध्यप्रदेश में अब 99 प्रतिशत शासकीय भुगतान इलेक्ट्रॉनिक होते हैं। केन्द्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक एग्रीगेशन एण्ड एनेलाइजर लेयर (ई-टॉल) पोर्टल में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन के मामले में मध्यप्रदेश को गुजरात के बाद देश में दूसरे
नम्बर पर रखा है। केंद्र सरकार ने अभी निर्णय लिया है कि सभी शासकीय कर्मचारियों को वेतन भुगतान उनके बैंक खाते में किया जाएगा। जबकि प्रदेश में पहले से ही शासकीय सेवकों के सभी भुगतान कैशलेस किए जा रहे हैं। प्रदेश में लगभग 5 लाख शासकीय कर्मचारियों का डाटा-बेस संधारित किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 75 लाख वेण्डर को भी भुगतान ई-माध्यम से किया जा रहा है। इनमें ठेकेदार, सप्लायर और गैर-शासकीय व्यक्ति
शामिल हैं। प्रदेश में साइबर ट्रेजरी की लोकप्रियता भी बढ़ी है। एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2013-14 में 25 लाख 78 हजार से अधिक ट्रांजेक्शन साइबर ट्रेजरी द्वारा हुए हैं। प्रदेश में ट्रेजरी सिस्टम के माध्यम से वर्ष 2009 में शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन व्यवस्था में अब तक 5 करोड़ 90 लाख ई-ट्रांजेक्शन हो चुके हैं। अभी तक 13 लाख 75 हजार 594 चेक का इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान हुआ है, जो कुल भुगतान का 99 प्रतिशत है। इनके माध्यम से 40 हजार करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है। प्रदेश सरकार के इन प्रयासों को केंद्र सरकार ने भी रेखांकित किया है। ई-भुगतान जैसे नवाचारी पहल के लिए मध्यप्रदेश को अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

सुशासन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के सफल प्रयोग के लिए तीन प्रधानमंत्री पुरस्कार जीतने वाला मध्यप्रदेश पहला और एकमात्र राज्य है। मध्यप्रदेश में किसानों को भुगतान हो या फिर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का वितरण, सबके लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन किया जा रहा है। यह कहा जा सकता है कि मध्यप्रदेश कैशलेस लेनदेन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। दरअसल, मध्यप्रदेश में पहले ही कैशलेस के लिए नवाचारी प्रयोग होने लगे थे, परंतु जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कैशलेस के लिए आह्वान किया है, तब से मध्यप्रदेश सरकार इस दिशा में और तेजी से प्रयास करने में जुट गई है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने कहा भी है कि वह मध्यप्रदेश को डिजिटल इंडिया में अगुवा बनाएंगे। मुख्यमंत्री पाइंट ऑफ सेल मशीन खरीदने के लिए प्रदेश के व्यापारियों को प्रोत्साहित और प्रेरित कर रहे हैं। इस संबंध में प्रदेश में पीओएस मशीनें वेट और प्रवेश कर से मुक्त कर दी गई हैं। राज्य की सलाहकारी उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसाओं पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नकद रहित हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए रोड मैप बनाने पर चर्चा की है। उनका मानना है कि बदलाव के इस दौर में वह मध्यप्रदेश को पिछडऩे नहीं देना चाहते। जब देश तेजी से नकद रहित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, तब वह चाहते हैं कि मध्यप्रदेश भी देश के साथ कदम मिलाते हुए आगे बढ़े।

यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने प्लास्टिक करेंसी  के उपयोग में मध्यप्रदेश को देश में शीर्ष स्थान पर लाने के लिए एक विशेष कार्य बल का गठन किया है, जो राज्य सरकार और बैंकों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही और कार्य योजनाओं में समन्वय स्थापित करेगा। प्रदेश सरकार ने कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं। जैसे प्रदेश के सभी शासकीय विभागों से वितरित होने वाली राशि का अब डिजिटल भुगतान किया जाएगा। शासकीय योजनाओं में सभी हितग्राहियों को भुगतान सीधे उनके खाते में किया जाएगा। सामान्य आदमी के लिए भी डिजिटल भुगतान को आसान बनाने के लिए सरकार मध्यप्रदेश में जिला प्रशासन और स्थानीय बैंकों के सहयोग से पंचायत स्तर तक प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। अब तक आयोजित इन शिविरों में सामान्य नागरिकों को इलेक्ट्रानिक भुगतान की प्रक्रिया को समझाया और सिखाया जा रहा है। कैशलेस लेनदेन को संभव बनाने के लिए सरकार अब तक डेढ़ करोड़ से अधिक रुपे कार्ड का वितरण कर चुकी है। साथ ही लोगों को रुपे कार्ड  के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जा
रहा है। प्रदेश के ग्रामीण और सुदूर इलाकों में बैंकिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए बैंक सखी और बैक मित्र तैयार किए गए हैं। प्रदेश के 11 हजार 864 ग्रामीण सब सर्विस एरिया
में बैंक सखी और बैंक मित्र की सहायता से भुगतान की व्यवस्था की गई है।

कभी बीमारू और पिछड़े राज्य का कलंक अपने सिर-माथे ढोने वाला मध्यप्रदेश अब धीरे-धीरे नवाचारों के लिए प्रख्यात हो रहा है। बदलते समय के साथ कदम मिलाने के लिए प्रदेश की ख्याति फैल रही है। नवाचारों का स्वागत करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश देश का सबसे पहला कैशलेस लेनदेन अर्थात् डिजिटल भुगतान करने वाला राज्य बन जाएगा, इसकी उम्मीद की जा सकती है। दूरदृष्टि राजनेता शिवराज सिंह चौहान के कारण डिजिटल इंडिया अभियान के पहले से ही मध्यप्रदेश में अनेक नागरिक सुविधाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दिया गया है। डिजिटल कल का भविष्य है। इस सच को प्रदेश सरकार ने अच्छे से समझ लिया है। इसलिए नागरिक सुविधाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक प्रयास किए जा रहे हैं। यही कारण रहा कि मध्यप्रदेश में पहले से ही कैशलेस के लिए वातावरण बन गया था। पूर्व से बने इस वातावरण के कारण ही प्रदेश में नोटबंदी के साइड इफैक्ट कम ही दिखाई दिए और जनता ने कैशलेस व्यवस्था को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसका स्वागत भी किया। क्योंकि आम आदमी भी जानता है कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन जितना अधिक होगा, उतनी अधिक पारदर्शिता आएगी। कैशलेस लेनदेन की व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर गहरी चोट पहुंचेगी। बिचौलियों और रिश्वतखोरों की भूमिका खत्म होगी। इसलिए प्रारंभिक स्तर पर थोड़ी-बहुत परेशानी उठाकर कैशलेस लेनदेन का स्वागत किया जा रहा है।

- लोकेन्द्र सिंह (लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,
भोपाल में कार्यरत हैं।)

 


Share
Bulletin