कॉन्वेंट स्कूल को टक्कर देता शासकीय माध्यमिक शाला सिरावली, जानें क्या है स्कूल की विशेषताएं

कॉन्वेंट स्कूल को टक्कर देता शासकीय माध्यमिक शाला सिरावली, जानें क्या है स्कूल की विशेषताएं

जफर शेख - आमतौर पर सरकारी स्कूलों को लेकर माना जाता है कि वहां पढ़ाई नहीं होती कोई अनुशासन नही होता  पर हम आज आपको  एक ऐसे स्कूल और प्रधानाध्यापक के बारे में बताने जा रहे है  जिसने अपनी मेहनत और ईमानदारी से स्कूल का कायाकल्प कर दिया इस प्रधानाध्यापक की कहानी किसी हिंदी फिल्म से कम नही हम बात कर रहे है कुरवाई तहसील के गांव सिरावली के शासकीय माध्यमिक शाला ओर उसके शिक्षक जिनका नाम है प्रमोद कुमार चौहान   चौहान ने अपने प्रयास से स्कूल का कायाकल्प कर दिया।

होटल जैसा किचन और शौचालय

स्कूल की बिल्डिंग किचन और शौचालय देखा जाए तो किसी आलीशान होटल से कम नही प्रधानाध्यापक श्री चौहान  की कोशिश है कि उनका स्कूल कान्वेंट स्कूलों से बेहतर साबित हो उनका कहना  है कि शैक्षणिक योग्यता  के लिहाज से शासकीय शाला के शिक्षक  प्राइवेट स्कूल से बेहतर होते हैं, इस लिहाज से  यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं है चौहान ने बताया कि बच्चे पड़ना चाहते है बस शिक्षक को अपना काम पूरी ईमानदारी से करना चाहिए।

सुमित कुशवाह ने सुनाए 60 तक के पहाड़े

सिरवाली के इस स्कूल में बच्चे न सिर्फ ड्रेस के साथ टाईबेल्ट लगाकर स्मार्ट बनकर आते हैं बल्कि पढ़ाई में भी उतने ही स्मार्ट हैं जब मीडिया ने बच्चों से नाम पूंछा तो उन्होंने अपना नाम इंग्लिश में बताया स्कूल के  छात्र सुमित कुशवाह ने 60 तक के पहाड़े सुना कर मीडिया की टीम को अचंभित कर दिया इतना है नही जब हमने कक्षा 6 छात्र नितिन प्रजापति से मिले तो उससे दुनिया के जिस देश की  राजधानी पूंछी तो बिना सोचे फटाफट बताता गया  मिडिया ने जब छात्र छात्राओं से सर के बारे में पूंछा तो उन्होंने बताया सर हमे पढ़ाने बहुत मेहनत करते है अगर हमे जरूरत पड़ती है तो अपने पास से भी कॉपी किताब उपलब्ध कराते है।

इस तरह के स्लोगन लिखे गए स्कूल की दीवारों पर

आपको बता दे प्रमोद कुमार चौहान आर्मी में रहकर भी देश को अपनी सेवा दे चुके है सन 2000 में आर्मी से रिटायर होकर 6 साल प्राइवेट स्कूल में छात्रों को पढ़ाया उसके बाद सन 2006 में शासकीय शिक्षक में उनका चयन हुआ उन्होंने जब से  ठान लिया था कि सरकारी स्कूल को भी कॉनवेन्ट के टक्कर में लाएंगे यहां सब कुछ वैसा ही है जैसा कॉनवेन्ट स्कूलों में होता है जगह कम होने के बाद भी चौहान ने अपनी मेहनत जन सहयोग से यह कम्प्यूटर लेब ओर लाइब्रेरी भी बना रखी है बच्चों को घंटे के मुताबिक पढ़ाया जाता है यह खास बात है ये भी है कि हाजरी के समय यह यस सर की जगह जय हिंद स्वच्छ भारत हमारा, वंदेमातरम, सब पड़ेंगे सब बढ़ेंगे जैसे स्लोगन के साथ छात्र अपनी उपस्थिति बताते है इसमे गर्व की बात है ये है कि इसी स्कूल से प्रेरणा ले कर पूर्व शिक्षा मंत्री ने पूरे प्रदेश के स्कूल में ये नियम लागू करने के निर्देश दिए थे।

छात्र-छात्राओं को साफ-सफाई के लिए किया जाता है प्रेरित

यह छात्र छात्राओं को साफ-सफाई के लिए प्रेरित किया जाता है यह मध्यान भोजन भी ऐसा  मिलता जिसकी जितनी तारीफ हो उतना कम यह पर खाना बनाने वाली बाई कुक की ड्रेस पहन कर खाना बनाती है उनका कहना कि चौहान सर कभी साफ सफाई और  बच्चो के खाने में कोई समझौता नही करते अगर कभी किसी समान की कमी होती है तो अपने पास से उस समान की कमी को पूरा करते है। माध्यमिक शाला  सिरावली  आज कॉनवेन्ट स्कूलों को टक्कर दे रहा है।

शासकीय स्कूल को लेकर बना भ्रम तोड़ा

ऐसे प्रयासों ने आम जनता में शासकीय स्कूल को लेकर बना भ्रम तोड़ा है ऐसे ही अगर सारे प्रधानाध्यापक और अध्यापक ठान लें तो हर स्कूल आदर्श बन जाऐ सिरावली की माध्यमिक शाला को स्वच्छता के लिए तहसील से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कार मिल चुके है ग्राम बसियो का कहना है कि चौहान सर के रूप में हमारे बच्चों को इस गुरु मिला है जिसने हमारे बच्चों का तो ठीक हम लोगो की सोच बदल दी अगर हर शिक्षक चौहान सर जैसा होतो सच मे स्कूल शिक्षा का मंदिर कहलाएगा।

 


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