सोहागपुरः प्रकृति देती मानसून आने की चेतावनी, 32 वर्षों से जारी है चमत्कारी घटना

सोहागपुरः प्रकृति देती मानसून आने की चेतावनी, 32 वर्षों से जारी है चमत्कारी घटना

देवेंद्र कुशवाहा- नर्मदांचल क्षेत्र में कुदरती चमत्कारों की कमी नहीं है और समूचा क्षेत्र किसी ना किसी विशेष चमत्कारों एवं घटनाओं के लिए जाना जाता है। इसी प्रकार की एक विशेष घटना पलकमती तट पर बसे सोहागपुर से कुछ किलोमीटर दूर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के विस्थापित ग्राम कुकरा के जंगल में 3 दशकों से अधिक समय से घटित हो रही है। उस घटना पर वर्ष 1987 से एक पर्यावरणविद के द्वारा लगातार नजर रखी जा रही है। समय-समय पर वन विभाग के सकारात्मक निर्णयों की तारीफ एवं जंगलों सहित वन्यजीवों के हित की बात रखने सहित विभाग के नकारात्मक निर्णयों के ऊपर सवाल उठाने वाले चाचा सैयद इलियास विगत 32 वर्षों से विस्थापित ग्राम कुकरा के जंगल में रिमिया नाले पर नजर रखे हुए हैं। उनके द्वारा लिखित प्रेक्षणों के आधार पर जिस दिन रिमिया अथवा झौंत नाले में पानी के स्रोत फूट जाते हैं, उससे लगभग 15 दिनों में प्रदेश में मानसून प्रवेश कर जाता है अर्थात रिमिया नाला मानसून आने की पूर्व सूचना देता है। उनके पास बीते वर्षों की रिमिया नाले में पानी के स्रोत फूटने एवं मानसून के प्रवेश करने की आंकड़े आज भी मौजूद हैं।

सोमवार को रिमिया नाले में पानी के स्रोत फूटे

साथ ही नगर के वरिष्ठ पत्रकार नीलम तिवारी लगातार इस घटना का कवरेज अपने समाचार पत्रों में करते आए हैं। वे भी इस घटना को प्रकृति का चमत्कार मानते हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार का दिन क्षेत्रवासियों सहित प्रदेशवासियों के लिए खुशी का दिन रहा क्योंकि रिमिया नाले में पानी के स्रोत फूट चुके हैं। जिसकी पुष्टि खुद एसटीआर के फील्ड डायरेक्टर एसके सिंह ने वरिष्ठ पर्यावरणविद् सैयद इलियास को एसएमएस करके बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए की है। अब आगामी 15 दिनों में मानसून आने से नर्मदांचल वासियों को क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी से निजात निश्चित रूप से मिलेगी और शीघ्र ही अच्छी बारिश के संकेत हेतु प्री-मानसून  गतिविधियों के आरंभ होने की खबर भी शीघ्र ही क्षेत्रवासियों को मिलने की संभावनाएं हैं।  

कैसे देता है रिमिया नाला मानसून आने की पूर्व सूचना

बताते हैं कि मानसून आने के पंद्रह बीस दिन पूर्व सतपुड़ा के घने जंगलों में आमों की झौंत के नीचे इस नाले की सूखी धरती अचानक शीतल जल के बुलबुले छोड़ने लगती है और कुकरा की झौंत से यह नाला बहता हुआ लगभग दस बारह किलोमीटर का सफर तय कर देनवा में समाहित हो जाता है। इसे रिमिया नाला अथवा पटेली नाले के नाम से भी क्षेत्र में जाना जाता है। इस नाले में पानी के स्रोत टूटने के बाद यहां के आदिवासी नारियल अगरबत्ती आदि से इसकी पूजा करते हैं और यह समझने लगते हैं कि अब बारिश नजदीक है। कुल मिलाकर यह कुदरती घटना मानसून आने का पूर्व संकेत मानी जाती है। इस समय भीषण गर्मी के चलते सभी जल स्रोत सूख चुके हैं जल स्तर काफी नीचे गिर गया, गर्मी का पारा चढ़ा हुआ तवा डैम भी सूखा पड़ा है पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। ऐसे में पत्थरों के बीच सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के पास प्रतिवर्ष मानसून का संकेत देते हुए यहां पानी निकल आता है। यह चमत्कार से कम नहीं।

वैज्ञानिकों ने भी 20 जून के आसपास मानसून आने के संकेत दिए

स्वराज एक्सप्रेस़ पिछले 2 वर्षों से इस घटना की खबर प्रकाशित कर रहा है। इस वर्ष भी 8 जून को इस रिमिया नाले में पानी निकल आया और आगामी 15 दिन में मानसून प्रदेश में दस्तक देगा, यानी 23 जून से मानसून प्रारंभ हो जाएगा। फील्ड डायरेक्टर एके सिंह ने दूरभाष पर चर्चा में बताया कि आगामी 4 वर्षों तक इस पर विशेष नजर रखेंगे और विशेषज्ञों की राय भी लेने का प्रयास कर रहे हैं। वैज्ञानिक तरीके से हटकर घटना घटित होती है। वैज्ञानिकों ने भी 20 जून के आसपास मानसून आने के संकेत दिए हैं। देखा जाए तो दोनों ही समय एक समान है। हमारा देश ऐसे ही चमत्कारी घटनाओं से भरा पड़ा है।


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