भय्यूजी महाराज का अंत दुर्भाग्यपूर्ण और समझ के बाहर है : सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर

भय्यूजी महाराज का अंत दुर्भाग्यपूर्ण और समझ के बाहर है : सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने भय्यूजी महाराज के निधन को अत्यंत दुखद और धक्का पहुंचाने वाला निरूपित किया उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों में लगे होने के बावजूद उनका इस तरह का अंत दुर्भाग्यपूर्ण और समझ के बाहर है, उन्होंने कहा कि यह सुनने में आया है कि पारिवारिक अथवा वैवाहिक विवाद के चलते इस तरह के कदम उन्होंने उठाएं हैं।

नर्मदा के संघर्ष में भी उन्होंने अपनी छोटी सी भूमिका अदा करने की कोशिश की। उन्होंने अन्ना जी के आंदोलन के दौरान भी अपनी भूमिका निभाई। सुश्री पाटेकर ने बताया कि उन्होंने भय्यू महाराज को अन्ना जी से मिलवाया था ताकि दोनों मिलकर कुछ काम कर सकें किंतु आध्यात्मिक और धार्मिक संतो की अन्ना जी के पास कोई भूमिका नहीं थी इसलिए उनका साथ लंबा नहीं चल पाया भय्यू महाराज ने अनाथ गरीब तथा सर्वहारा वर्ग के लिए कई प्रोजेक्ट आरंभ किए यहां तक कि नर्मदा बचाओ आंदोलन के संघर्ष के दौरान पिछली बार वे संघर्ष को समाप्त करने के लिए सरकार के मध्यस्थ के रूप में आए थे किंतु कोई ठोस आश्वासन दिए जाने की मांग पर सहज सरल भय्यू महाराज ने असमर्थता व्यक्त करते हुए अपने आप को पीछे कर लिया था।

वह एक सहज सरल व्यक्ति थे जिनके राजनेताओं से बहुत अच्छे संबंध थे। वह प्रत्यक्ष रुप से राजनीति में नहीं उतरे लेकिन राजनीति को उन्होंने अछूता नहीं माना। उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था किंतु साधन-संपन्न भय्यूजी महाराज ने सरकार कि वह पेशकश ठुकरा दी थी।


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