शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले स्कूलों में फर्जी तरीके से मान्यता प्राप्त करने का मामला आया सामने

शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले स्कूलों में फर्जी तरीके से मान्यता प्राप्त करने का मामला आया सामने

विकास सिंह सोलंकी - मध्यप्रदेश की एजुकेशनल हब के रूप में जाने जाने वाला इंदौर शहर में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले स्कूलों में फर्जी तरीके से मान्यता प्राप्त करने का सनसनी मामला सामने आया है इंदौर में एक नहीं, बल्कि नौ ऐसे स्कूल है जहाँ तकनीक का दुरुपयोग कर स्कूलों को मान्यता प्राप्त कराई गई है। दरअसल शिक्षा के अधिकार के तहत जिले में कुछ स्कूलों की मान्यता फर्जी तरीके से जिला शिक्षा अधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से कराया गया।

सीईओ ने की कार्रवाई करने की बात

मामले को तूल-पकड़ता देख जिला पंचायत सीईओ ने अब कार्रवाई करने की बात कही स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकृत लॉगिन पासवर्ड का दुरुपयोग पर अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा अशासकीय स्कूल की मान्यता दी गई इस बात की जानकारी जब आरटीआई एक्टिविट्स संजय मिश्रा को लगी तो शिकायत जिला पंचायत सीईओ नेहा मीणा से की इस पूरे मामले में दो अधिकारियो की भूमिका संदिग्ध है स्कूलों की फर्जी मान्यता 18 सितम्बर से 18 नवंबर 2018 के बीच हुआ है जिला शिक्षा अधिकारी सीपी शर्मा ने 9 अगस्त से 29 अक्टूबर तक अवकाश पर थे इसके कारण जिला परियोजना समन्वयक अक्षय राठौड़ प्रभार संभाल रहे थे।

जांच के बाद लिया जाएगा निर्णय

आरटीआई एक्टिविट्स संजय मिश्रा जहाँ इस मामले में सवालिया निशान खड़े कर रहे है वही इस पूरे मामले में जिला पंचायत सीईओ का कहना है कि एक बार जिला शिक्षा अधिकारी को अपनी बात कहने का मौका दिया जाएगा पूरे मामले की जांच के बाद ही कुछ भी निर्णय लिया जायेगा गौरतलब है कि इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद पहले साइबर सेल से मामले की जांच कराने की बात सामने आई थी लेकिन अब अपने स्तर पर ही मामले को निपटाने की बात जिला पंचायत सीईओ करते दिख रही है।

 


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