रहली विकास खंड का ऐसा स्कूल जहां लिखा है, यह जगह खतरनाक है यहां जाना मना है

रहली विकास खंड का ऐसा स्कूल जहां लिखा है, यह जगह खतरनाक है यहां जाना मना है

योगेश सोनी : सरकार के तमाम दावों के बाद भी अनेक सरकारी स्कूल ऐसे है जिनमें आज भी बच्चों को पेड के नीचे खुले आसमान में पढाई करना मजबूरी है।इन स्कूलों के भवन इतने जर्जर हालत में है कि दूर से देखने में भी डर लगता है।

बता दें कि स्कूल भवन जर्जर तो है ही इसमें अब सांप बिच्छू आदि ने भी घर बना लिया है स्कूल के बच्चे तो ठीक मासाब भी आसपास नहीं भटकते है। जिस स्कूल में बच्चे बैठकर ज्ञान प्राप्त करना चाहते है उस स्कूल  की दीवार पर स्कूल के मासाब ने लिखवा दिया है यह जगह खतरनाक है यहां जाना मना है। यह स्कूल रहली विकास खंड में रहली नगरपालिका के वार्ड 14 के अंर्तगत आता है। जबकि स्कूल नजदीक की ग्राम पंचायत रेवझा से जुडा हुआ है। 

गौरतलब है कि इस स्कूल की तरफ ना कभी ग्राम पंचायत ने रुख किया और ना ही नगरपालिका ने नजर डाली। तारीफ की बात है कि यहां के बच्चों को यहां के रहवासियों को सड़क और पानी से मोहताज रखा गया है। स्कूल जाने के लिए सड़क नही है पीने तक का पानी नही है बच्चे पानी पीने नजदीक बनी सुनार नदी के किनारे बनी झिरिया का पानी पीने मजजबूर है।

जब इस संबंध में जब हमने स्कूल के शिक्षको से बात की तो उनका कहना है कि अनेक बार शासन को पत्र लिखकर हालात से अवगत करा चुके है लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नही हुई है। स्कूल के शिक्षक पामता रजक का कहना है पिछले पांच सालो से यह भवन जर्जर है अंदर स्कूल लगाने में दीवार गिरने ओर जहरीले जीवजंतुओ का खतरा है इसलिये बाहर खुले में ही क्लास लगाते है।स्कूल भवन सुधार हेतु अनेक पत्र लिख चुके है लेकिन अब तक विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई है।

चाहे ठंड हो या गर्मी या बारिस इस स्कूल के बाहर लगा पेड़ ही अब इन बच्चों का भवन है इसी की छाया में पिछले चार बर्षों से अध्यापन कार्य चल रहा है इसी पेड की छाया में गर्मी ओर बारिस यही पढ़ना और पढाना मजबूरी बन गया है। स्कूल भवन की हालत को लेकर जब हमने विभागीय अधिकारी बीआरसी आर एस दीक्षित से बात की तो उन्होने भी भविष्य में स्कूल भवन का सपना दिखाकर पल्ला झाड लिया अब जिम्मेदार ही अपनी जिम्मेदारी से बचने लगेगे तो फिर ऐसे में कैसे स्कूल में पढेगे छात्र छात्राये।


Share
Bulletin