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सिर्फ़ ताकत ही नहीं, संस्कृति और एकजुटता का भी प्रदर्शन: 77वें गणतंत्र दिवस परेड में देखें 'वंदे मातरम' और आत्मनिर्भर भारत की झलक

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Jan 26, 2026

सिर्फ़ ताकत ही नहीं, संस्कृति और एकजुटता का भी प्रदर्शन: 77वें गणतंत्र दिवस परेड में देखें 'वंदे मातरम' और आत्मनिर्भर भारत की झलक

 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर हुई भव्य परेड ने देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और 'आत्मनिर्भर भारत' की ओर बढ़ते कदमों को प्रदर्शित किया। 'वंदे मातरम' की थीम पर केंद्रित इस समारोह में 29 विमानों की उड़ान, ऑपरेशन सिंदूर के कमांड सेंटर का प्रदर्शन और महिला अग्रणियों की भूमिका ख़ास आकर्षण रही।

 सैन्य शक्ति और वीरता का सम्मान

परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ध्वजारोहण और 21 तोपों की सलामी से हुई। सैन्य बलों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुआ इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर भी शामिल था। वायुसेना के 29 विमानों, जिनमें सुखोई और राफेल शामिल थे, ने आकाश में छा दिया। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

 विविधता और 'आत्मनिर्भर भारत' की झांकियाँ

परेड में 30 झांकियों ने देश की एकता और प्रगति को दर्शाया। 17 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और 13 मंत्रालयों की झांकियाँ 'स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम्, समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत' की थीम पर आधारित थीं। एनडीआरएफ की झांकी ने भुज भूकंप के 25 वर्षों की यात्रा दिखाई।

 महिला शक्ति और युवा नेतृत्व का डंका

इस वर्ष की परेड में महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भूमिका स्पष्ट थी। महिला भारतीय तटरक्षक दल का नेतृत्व असिस्टेंट कमांडेंट निशी शर्मा ने किया। जयपुर की चारू सिंह ने एनएसएस मार्चिंग ग्रुप का, तो मानसी विश्वकर्मा ने 148 गर्ल्स कैडेट वाले एनसीसी दल का नेतृत्व संभाला।

 वीरों की विरासत और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

तीनों सेनाओं की वेटरन्स झांकी ने 'संग्राम से राष्ट्रनिर्माण तक' की यात्रा को प्रदर्शित किया। यूरोपीय संघ का एक दस्ता भी परेड में शामिल हुआ, जो भारत के बढ़ते वैश्विक सहयोग का प्रतीक था। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस अवसर के मुख्य अतिथि थे।

 लोकतंत्र का उत्सव और जनता से जुड़ाव

लगभग 90 मिनट तक चले इस समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दर्शक गैलरी में जनता से रूबरू होकर इस लोकतांत्रिक उत्सव को और समृद्ध किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने मुख्य अतिथियों के साथ बग्घी में सवार होकर परंपरा का निर्वहन किया।

 

 

Report By:
Monika