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अटल बिहारी वाजपेयी को इंदिरा गांधी में दिखती थीं दुर्गा

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Dec 25, 2016

लखनऊ। कवि अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के लिए हमेशा ही दलगत भावना से ऊपर उठकर काम किया। वह किसी की भी प्रशंसा करने में जरा भी पीछे नहीं हटते थे। इसी कारण से आज विश्व की राजनीति में उनकी एक अलग पहचान है। पिछले कुछ दिनों से सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है। दोनों पार्टी के नेताओं के आपसी गतिरोध के चलते संसद तक नहीं चल पा रही है। ऐसे में बड़े दिलवाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वापपेयी का संसद में दिया हुआ वो भाषण याद आता है, जिसमें उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दुर्गा कहकर संबोधित किया था। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आज 91 साल के हो गए हैं।

लोकसभा में वर्ष 1971 में एक मौका ऐसा आया था जब पक्ष और विपक्ष दोनों एक मुद्दे पर साथ आए थे। वर्ष 1971 में अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष के नेता थे और इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर देश की नेतृत्व कर रही थीं। अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष के नेता के तौर पर एक कदम आगे जाते हुए इंदिरा को 'दुर्गा' करार दिया। वाजपेयी ने यह शब्द इंदिरा के लिए उस समय प्रयोग किए जब भारत को पाकिस्तान पर 1971 की लड़ाई में एक बड़ी जीत हासिल हुई थी।

गौरतलब है इस युद्ध में पाकिस्तान के 90,368 सैनिकों और नागरिकों ने सरेंडर किया था। इस विजय पर अटल बिहारी वाजपेयी ने सदन में कहा था कि जिस तरह से इंदिरा ने इस लड़ाई में अपनी भूमिका अदा की है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। सदन में युद्ध पर बहस चल रही थी और अटल बिहारी वाजपेयी के मुताबिक हमें बहस को छोड़कर इंदिरा की भूमिका पर बात करनी चाहिए जो किसी दुर्गा से कम नहीं थी।

आज के आधुनिक दौर की राजनीति में जहां संकुचिक मानसिकता वाला विपक्ष कभी-कभी ही पक्ष के किसी नेता की अहमियत को पहचान पाता है, वाजपेयी ने उस समय यह बात करके शायद एक नई मिसाल कायम की थी। ईस्ट पाकिस्तान में रहने वाले बंगाली समुदाय पर पाकिस्तान सेना का जुल्म बढ़ता ही जा रहा था। यहां के निवासी हिंदु अल्पसंख्यकों पर अत्याचार थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। 10 मिलियन की हिंदु आबादी को खत्म करने के लिए जनरल टिक्का खान जिसे 'बंगाल का कसाई' का टाइटल तक दे डाला गया था, वह लोगों को मारने पर उतारु था। बतौर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लगातार अंतराष्ट्रीय समुदाय से अपील कर रही थीं कि वह इस तरफ ध्यान दें लेकिन हर बार उनकी अपील को अनसुना कर दिया गया। इसके बाद इंदिरा गांधी 27 मार्च 1971 को ने फैसला लिया कि वह ईस्ट पाकिस्तान में चल रहे संघर्ष को खत्म करके रहेंगी। उन्हें उनकी सरकार के बाकी मंत्रियों का भी समर्थन मिला।