भगवान को पाना अत्यंत सरल, दास भाव का होना नितांत आवश्यक

भगवान को पाना अत्यंत सरल, दास भाव का होना नितांत आवश्यक

गरियाबंदः शहर के अमलोर में चल रहे भागवत कथा के दौरान आचार्य जयशंकर महाराज ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान को पाना अत्यंत सरल है। जब सुरदास, कालिदास, तुलसीदास, कबीर दास, मीरा, राधा अपने आराध्य को प्राप्त कर सकते हैं तो आज के कलयुग में क्यों नहीं। आचार्य ने कहा कि भगवान को पाना अत्यंत सरल है। इसके लिए दास भाव का होना नितांत आवश्यक है। दास के भाव को समझाते हुए उन्होंने कहा कि समर्पण की भावना ईश्वर के प्रति हो उसे ईश्वर के साक्षात्कार होते हैं। ईश्वर कोई और नहीं उनके विचारों में भिन्नता और प्रत्यक्ष रूप से अहसास कराने वाली ऐसी शक्ति है, जिसे अनुभूति मात्र से गम का वातावरण हर्ष में तब्दील हो जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि भगवत भक्ति का प्रसाद हर किसी को मिल जाए यह भी संभव नहीं है। इसलिए जो जिसके भाग्य में होता है उसे ही मिलता है।

अगर मन को केंद्रित करना है तो मोबाइल से करें तौबा

आचार्य ने व्यासपीठ से कहा कि यदि आप अपने मन को केंद्रित करना चाहते है तो मोबाइल से तौबा करें, जब जरुरत हो तभी उसका प्रयोग करें। आप यदि उसके आदि हो गए तो आपका मन और दिमाग दोनों हमेशा सक्रिय ही रहेंगे। मनोमस्तिष्क में असंतुलन पैदा करेंगे। जो जीवन के लिए घातक है। इसका असर आपके बच्चों पर भी पड़ेगा। समय रहते नियंत्रण करना जरूरी है। कथा सुनने पहुंचे श्रोता भक्ति मय संगीत की धुन पर भक्तिमय नजर आए। कान्हा कन्हैया की संगीत ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा में परीक्षित के रूप में कथा का परायण आचार्य विजय शंकर महाराज ने किया।

 


Share
Bulletin