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गरियाबंद में एक प्राईवेट स्कूल की तानाशाही दिव्यांग छात्र पर पड़ी भारी

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Aug 4, 2018

पुरूषोत्तम पात्रा :  आंखो से देख पाने में असमर्थ देवभोग विकासखंड के कोदोबेडा निवासी योगेन्द्र पात्र पढ लिखकर अपने जीवन में उजाला लाना चाहता था, इसके लिए उसने नजदीक में सरकारी स्कूल होने के बावजूद भी अच्छी पढाई के लिए 15 किमी दूर भारतमाता इंगलिस मिडियम स्कूल में दाखिला लिया, तीन साल उसी स्कूल में पढाई भी की, मगर पिछले साल की फीस समय पर जमा नही करवा पाने के कारण इस बार स्कूल प्रबंधन ने उसको दाखिला देने से मना कर दिया, यही नही स्कूल प्रबंधन ने जबरन टीसी काटकर उनके हाथ में पकडा दी, मजबूर योगेन्द्र के पढने लिखने का सपना अधूरा रह गया।

स्कूल प्रबंधन कैमरे के सामने आने को तैयार नही है, हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी एसएल ओगरे स्कूल के फैसले से इतफाक नही रखते, उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है और कोई भी स्कूल बच्चों को इस तरह दाखिला देने से मना नही कर सकता, फिर चाहे बात फीस से ही जुडी क्यों ना हो, उन्होंने तत्काल इस मामले का समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।

शिक्षा को व्यापार का जरिया बना चुके प्राईवेट स्कूलो के लिए इस तरह का यह कोई पहला मामला नही है, बल्कि प्रदेश के अलग अलग हिस्सों से समय समय पर इस तरह के मामले सामने आते रहे है, बडा सवाल है कि आखिर सरकार ऐसे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने में असमर्थ क्यों नजर आ रही है, इस तरह के मामले सामने आने के बाद प्रशासन द्वारा दोषी स्कूलों पर कठोर कार्यवाही के दावे हमेशा खोखले साबित होते है, देखने वाली बात होगी कि इस मामले को प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है।