कोरिया में स्ट्राबेरी की खेती पर रिसर्च, तीन प्रजातियों पर पाई सफलता!

कोरिया में स्ट्राबेरी की खेती पर रिसर्च, तीन प्रजातियों पर पाई सफलता!

कोरिया। कोरिया जिले के बरबसपुर से लगे ग्राम लोहारी में स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्र में बीते दो वर्षों से स्ट्राबेरी की खेती पर रिसर्च किया जा रहा है, जिसके लिए इस केंद्र में स्ट्राबेरी के 12 किस्म की प्रजातियों के पौधों को रोपित किया गया जिसमें दो से तीन प्रजातियों पर सफलता भी हासिल की गई है। पर सवाल इसके मार्केटिंग को लेकर उठ रहे है जिसकी व्यवस्था यदि हो जाये तो किसान एक पौधे से 400 से 500 तक का लाभ ले सकते है।

ग्राम लोहारी स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय व कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र विस्तारक अधिकारी आर पी टेमरे ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त स्ट्राबेरी की खेती पिछले वर्ष से शुरू की गई है। जिसमे हमने पहले इसकी 12 किस्म की प्रजातियों के मात्र 700 पौधे रोपित कर इसका रिसर्च किया था जिसमे हमको अच्छा रिजल्ट मिला था। इस वर्ष हमने इन्ही 12 किस्म की स्ट्राबेरी की प्रजातियों के लगभग 20 डिसमिल में एक हजार पौधे रोपित किये है। जिसमे हैदर, पराग, स्वीट,चिली,गिली, जैसी प्रजाति है।

उन्होंने बताया कि उक्त स्ट्राबेरी के एक पौधे से डेढ़ किलो स्ट्राबेरी का उत्पादन होता है जिसकी लागत कीमत एक पौधे की 40 रुपए और उसमें मेहनत मिलाकर मात्र सौ रुपए के करीब होती है जिसका बाजार मूल्य 400 रुपए किलो है जिससे किसानों को एक पौधे से 400 से 500 रूपए तक का लाभ मिल सकता है।इसकी खेती के लिए ठंड का मौसम अनुकूल होता है। लोहारी समेत आसपास का क्षेत्र इसकी खेती के लिए अनुकूल है।यही वजह है कि इसकी खेती अकटुबर के माह में की जाती है । जिसे तैयार होने में लगभग 3 माह का समय लगता है।

इसके तैयार होने के बाद इसे स्टोर करने के लिए 9 से 20 डीग्री तक के टेम्प्रेचर की जरूरत होती है। ऐसे में इसके लिए फ्रीजर या कोल्ड स्टोर की आवश्यकता पड़ती है।हालांकि लोहारी सिंचित क्षेत्र होने के कारण यहाँ का तापमान 20 डिग्री तक रहता है जिसमे इसे 12 घण्टे तक लगभग बाहर ही बिना फ्रीजर के रखा जा सकता है।इस स्ट्राबेरी के खेती से किसानों को लाभ तो अच्छा है पर ग्रामीण क्षेत्रो में इसकी मार्केटिंग नही होने के कारण इसकी मांग नही है। जिससे किसान इसमें रुचि कम दिखा रहे है।हालांकि शहरी क्षेत्रों में इसकी मांग है।
 


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