Dec 20, 2016
जगदलपुर। मेडिकल कॉलेज सह महारानी अस्पताल (मेकाज) के नेत्र विभाग के डॉक्टरों ने सोमवार को एक बड़ा ऑपरेशन दो घंटों में ही कर दिखाया. अव्यवस्था और लापरवाही का आरोप झेलने वाले इस हास्पिटल के नेत्र विभाग के डॉक्टरों ने एक ही ऑपरेशन से पूरे हास्पिटल की छवि बदल डाली है.यहां कोडागांव जिले के बड़ेकनेरा गांव की 52 वर्षीया धनमती की आंख का ऑपरेशन किया गया. धनमती की आंख कैंसर से खराब हो गई थी. इसके बाद उसे दिखना तो बंद हो ही गया था, कैंसर शरीर के दूसरे हिस्से में भी फैल रहा था. परिजन उसे कोंडागांव के जिला हास्पिटल लेकर पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने इलाज की सुविधा नहीं होने की बात कहते हुए मेकाज रेफर कर दिया.
मेकाज में भी इस तरह का ऑपरेशन पहले कभी डॉक्टरों ने नहीं किया था. ऐसे में उसे रायपुर रेफर करने की तैयारी की जा रही थी. इसी बीच नेत्र विभाग के डॉ. ई. बंसत मूर्ति ने महिला की आंख का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया. ऑपरेशन से पहले वे इसकी खबर कमिश्नर और कलेक्टर को करना चाहते थे. इसके बाद अलेक्जेंडर चेरियन ने इसकी जानकारी अफसरों तक पहुंचाई और फिर आंख के ऑपरेशन का निर्णय लिया गया. डॉक्टरों ने कैंसरग्रस्त आंख को बाहर निकाल दिया. अब यदि धनमती को आर्थिक मदद मिलती है तो वह नकली आंख भी लगवा सकती है.
डॉक्टरों ने धनमती की कई चरणों में जांच की. पहले चरण में आंख के हिस्से को कुरेदा गया. इसके बाद सोमवार को आंख के ऑपरेशन की शुरूआत की गई. सबसे पहले डॉक्टरों की टीम ने आंख और उसके आसपास फैले कैंसर वाले भाग को काटकर बाहर निकाला. इसके बाद आंख में जिस-जिस स्थान पर कैंसर के टिशू थे उसे काटा. इस पूरी प्रक्रिया में आंख के पास बड़ा गड्ढा हो गया. ऐसे में इस गड्ढे को भरने के लिए जांघ से चमड़ी निकालकर वहां लगाई गई.
धनमती का ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज सह महारानी हास्पिटल में डॉ. ई. बंसत मूर्ति ने मुफ्त में ही कर दिया. ऑपरेशन में लगने वाली दवाएं व अन्य सामान भी हास्पिटल से जुटाए गए. यदि यही ऑपरेशन किसी बड़े अस्पताल में होता तो धनमती को कम से कम तीन लाख रुपए खर्च करने पड़ते. धनमती के ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका तो डॉ. ई. बंसत मूर्ति ने निभाई. इसके अलावा उनकी टीम में डॉ. राकेश सोरी, डॉ. आशालता, डॉ. हनीशा एम., डॉ. टीसी आडवानी और इंटर्न डॉ. मनीषा बाखला के अलावा स्टाफ नर्स मीरा दास, वार्ड ब्वाय अशोक कुमार बघेल शामिल थे।








