Jan 1, 2018
नाना पाटेकर एक ऐसे कलाकार जिन्होने नायक,सहनायक, खलनायक और चरित्र कलाकार भूमिकाओं से दर्शकों को अपना दीवाना बनाया है। नाना पाटेकर उर्फ विश्वनाथ पाटेकर का जन्म मुंबई में 01 जनवरी 1951 को एक मध्यम वर्गीय मराठी परिवार में हुआ। उनके पिता दनकर पाटेकर चित्रकार थे । नाना ने मुंबई के जे.जे स्कूल आफ ऑर्टस से पढ़ाई की। इस दौरान वह कॉलेज द्वारा आयोजित नाटकों में हिस्सा लिया करते थे । नाना पाटेकर को स्केचिंग का भी शौक था और वह अपराधियों की पहचान के लिये मुंबई पुलिस को उनकी स्केच बनाकर दिया करते थे।
नाना ने अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1978 मे प्रदर्शित फिल्म .गमन .से की लेकिन इस फिल्म में दर्शकों ने उन्हें नोटिस नही किया। अपने वजूद को तलाशते नाना को फिल्म इंडस्ट्री में लगभग आठ वर्ष संघर्ष करना पड़ा।
उन्हें पहला बड़ा ब्रेक फिल्म अंकुश 1986. से मिला। इस फिल्म में नाना पाटेकर ने एक ऐसे बेरोजगार युवक की भूमिका निभायी जो काम नहीं मिलने पर समाज से नाराज है और उल्टे सीधे रास्ते पर चलता है। अपने इस किरदार को नाना पाटेकर ने इतनी संजीदगी से निभाया कि दर्शक उस भूमिका को आज भी भूल नही पाये है।
वर्ष 1991 में नाना ने फिल्म निर्देशन में भी कदम रखा और प्रहार का निर्देशन किया साथ ही अभिनय भी किया। इस फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने अभिनेत्री माधुरी दीक्षित से ग्लैमर से विहीन किरदार निभाकर दर्शकों के सामने उनकी अभिनय क्षमता का नया रूप रखा।
वर्ष 1992 में फिल्म तिरंगा जिसमें नाना पाटेकर के सिने कैरियर की पहली सुपरहिट फिल्म साबित हुआ। नाना पाटेकर ने भी अपनी विशिष्ट संवाद शैली से राजकुमार को अभिनय के मामले में कड़ी टक्कर देते हुये दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
वर्ष 1996 मे फिल्म खामोशी में उनके अभिनय का नया आयाम दर्शकों को देखने को मिला। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेत्री मनीषा कोईराला में गूंगे पिता की भूमिका निभाई। यह भूमिका किसी भी अभिनेता के लिये बहुत बड़ी चुनौती थी।
वर्ष 1999 में नाना पाटेकर को फिल्म कोहराम में भी काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में उनके अभिनय के नये आयाम देखने को मिले। फिल्म में उन्हें सुपरस्टार अमिताभ बच्च्न के साथ पहली बार काम करने का मौका मिला।
फिल्म वेलकम में नाना पाटेकर के अभिनय का नया रंग देखने को मिला। नाना ने जबरदस्त हास्य अभिनय कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर अपने आलोचकों का मुंह सदा के लिये बंद कर दिया और फिल्म को सुपरहिट बना दिया।
नाना पाटेकर को अब तक चार बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नाना पाटेकर को तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। नाना पाटेकर फिल्म की संख्या के बजाए फिल्म की गुणवत्ता को अधिक महत्व देते है इसी को देखते हुये नाना ने अपने जीवन के तीन दशक लंबे सिने करियर में महज 60 फिल्मों में काम किया है।