बैरागढ़ः शमशान पहुंचने से पहले शवयात्रा को पार करना पड़ता है नाला

बैरागढ़ः शमशान पहुंचने से पहले शवयात्रा को पार करना पड़ता है नाला

विवेक शर्मा - ईंटखेड़ी पंचायत के खामलाखेड़ी गांव में शमशान घांट तक पहुंचने से पहले 2 फिट पानी से भरा नाला पार करना पड़ता है। जहां एक और शहरों में शमशान पर करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं और दाह संस्कार के लिए अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं, वहीं राजधानी भोपाल से मात्र 21 किलोमीटर दूर स्थित खामलाखेड़ी गांव के श्मशान तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं है। यहां बारिश में किसी की मौत हो जाने पर ग्रामीणों को न सिर्फ कीचड़ भरे रास्ते से तो होकर तो गुजरना पड़ता है, बल्कि लोगों को पानी से भरा नाला भी पार करना पड़ता है।

सरपंच पर दोहरी मानसिकता, वोट नहीं दिया तो रोड़ कैसा

ग्रामीणों को सिर्फ बारिश में ही नहीं बारिश के बाद भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यहां रास्ते के बीच में पड़ने वाले नाले में बारिश के 4 महीने बीत जाने के बाद भी पानी और कीचड़ भरा रहता है। ग्रामीणों ने कई बार नाले पर पुलिया बनाने या मुरम डालकर रास्ता बनाने की मांग की है लेकिन किसी भी जन प्रतिनिधि ने इस और ध्यान नहीं दिया। सरपंच, जनपद सदस्य, जिलापंचायत, सभी जगह मांग की जा चुकी है लेकिन सब चुप्पी साधे बैठे हैं। ग्रामीणों ने सरपंच पर दोहरी मानसिकता की राजनीति करने के आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने बताया कि जब भी सरपंच से सड़क या पुलिया की मांग की जाती है तो वो कह देते हैं कि वोट तो दिया नहीं अब काम कैसे करवा दूं। ग्रामीणों की मांग है कि नाले पर सीमेंट पाइप डालकर ऊपर से कॉन्क्रीट रोड़ बनाई जाए लेकिन अगर सड़क बनाना पॉसिबल न हो तो पाईप पर मुरम डाल दी जाए ताकि आसानी से आ जा सकें।


Share
Bulletin