Jan 8, 2026
सीएम की सख्ती: सुबह 10 बजे कुर्सी पर हाजिर रहें अधिकारी!
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए साल की शुरुआत में ही प्रदेश की नौकरशाही को अनुशासन का कड़ा संदेश दे दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक में सीएम ने समय की पाबंदी पर जोर देते हुए साफ कहा कि अब दफ्तरों में देरी से आने की आदत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी आला अफसरों को निर्देश दिए कि सुबह 10 बजे तक अपनी कुर्सी पर मौजूद रहें और बायोमेट्रिक सिस्टम से उपस्थिति अनिवार्य करें।
मुख्य सचिव समय पर, तो अन्य क्यों लेट?
बैठक में मुख्यमंत्री ने हल्के अंदाज में लेकिन सख्त लहजे में कहा कि मुख्य सचिव तो ठीक 10 बजे कार्यालय पहुंच जाते हैं, फिर अन्य वरिष्ठ अधिकारी 11 बजे के बाद क्यों आते हैं? उन्होंने कोरोना काल से चली आ रही पांच दिन की कार्य सप्ताह व्यवस्था का जिक्र कर स्पष्ट किया कि इसका मतलब काम की गति कम करना नहीं है, बल्कि अधिक समय का सदुपयोग करना है। सीएम ने अफसरों को सुझाव दिया कि वे अन्ना हजारे के गांव रालेगण सिद्धि का दौरा करें और वहां के विकास मॉडल से प्रेरणा लेकर प्रदेश के लिए नई योजनाएं बनाएं।
कहानियों से समझाया संदेश
अपने अनोखे अंदाज में सीएम ने बैठक को रोचक बनाते हुए कुछ व्यक्तिगत प्रसंग साझा किए। उन्होंने हाथी के बच्चों से जुड़ा एक वाकया सुनाकर वन्यजीव संरक्षण की जरूरत पर बल दिया। वहीं, मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक पुरानी घटना का उदाहरण दिया, जहां उन्होंने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए ऐसे आयोजन में भोजन ग्रहण करने से इनकार कर दिया।
किसानों की समृद्धि पर फोकस
विकास कार्यों की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने 15 से ज्यादा विभागों को एकजुट होकर काम करने के निर्देश दिए। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को मिलाकर 'समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश' महाअभियान को तेजी से लागू करने पर जोर दिया गया। सीएम ने योजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
यह बैठक प्रदेश में अनुशासन और विकास की नई लहर का संकेत दे रही है।








