Loading...
अभी-अभी:

मध्यप्रदेश की हवा में घुला जहर: भोपाल-इंदौर समेत 8 शहरों में प्रदूषण चरम पर, NGT ने सरकार को दी सख्त चेतावनी

image

Jan 8, 2026

मध्यप्रदेश की हवा में घुला जहर: भोपाल-इंदौर समेत 8 शहरों में प्रदूषण चरम पर, NGT ने सरकार को दी सख्त चेतावनी

 मध्यप्रदेश में पानी की समस्या के बाद अब हवा भी जहरीली होती जा रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राजधानी भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा संकट बताते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। यह मामला जनस्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण बेहद गंभीर है, क्योंकि इन शहरों में हवा की गुणवत्ता मानकों से काफी खराब हो चुकी है।

 नॉन-अटेनमेंट शहरों की सूची में शामिल हुए आठ शहर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली को नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित किया है। इन शहरों में पिछले कई वर्षों से PM10 और PM2.5 जैसे खतरनाक कणों का स्तर निर्धारित सीमाओं से अधिक बना हुआ है।

 भोपाल में हवा सबसे ज्यादा खराब

झीलों के शहर भोपाल में स्थिति सबसे चिंताजनक है। यहां PM10 का सालाना औसत 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है, जबकि PM2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। ये आंकड़े मानक से कई गुना ज्यादा हैं, जिससे सांस की बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। कई क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच रहा है।

 दिल्ली मॉडल क्यों नहीं अपनाया गया?

NGT ने सवाल उठाया है कि दिल्ली-एनसीआर में लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) जैसी प्रभावी व्यवस्था मध्यप्रदेश में क्यों नहीं बनाई गई। ट्रिब्यूनल का मानना है कि राज्य में कोई मजबूत तंत्र न होने की वजह से प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

 ज्वॉइंट कमेटी का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT ने एक संयुक्त समिति बनाई है। इसमें पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन, परिवहन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि और CPCB के विशेषज्ञ शामिल हैं। इस समिति को हवा की गुणवत्ता सुधारने की ठोस रणनीति तैयार करनी है।

 रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा

समिति को छह सप्ताह के अंदर मौजूदा स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट पेश करनी होगी। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस प्रक्रिया की मुख्य एजेंसी बनाया गया है। राज्य सरकार और संबंधित विभागों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

अगली सुनवाई की तारीख

यह पूरा मामला याचिकाकर्ता की अर्जी पर चल रहा है। NGT की भोपाल बेंच ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को होगी, जहां रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। उम्मीद है कि इससे प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

 

Report By:
Monika