Jan 2, 2026
भीमबेटका में उभरेगी 30 हजार साल पुरानी कला की जीवंत दुनिया: देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूजियम
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका की प्राचीन शैल चित्रकलाएं अब पर्यटकों के लिए पहले से कहीं ज्यादा आसान और रोचक तरीके से उपलब्ध होने वाली हैं। मध्य प्रदेश में स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूजियम विकसित किया जा रहा है, जहां 750 से ज्यादा शैलाश्रयों की हूबहू प्रतिकृतियां एक ही जगह पर देखी जा सकेंगी। यह अनोखा प्रयास प्राचीन कला को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा देगा।
ईको-फ्रेंडली डिजाइन और पर्यावरण संरक्षण
यह म्यूजियम करीब 1.12 हेक्टेयर क्षेत्र में बनेगा और इसकी अनुमानित लागत 19 करोड़ रुपये है। 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। पारंपरिक इमारतों की जगह अस्थायी और पर्यावरण अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल होगा, ताकि भीमबेटका का प्राकृतिक परिवेश बरकरार रहे। यहां मूल गुफाओं जैसा ईको पार्क तैयार किया जाएगा, जहां पर्यटक प्रकृति के बीच प्राचीन कला का आनंद ले सकेंगे।
डिजिटल तकनीक से जीवंत होगी प्राचीन कहानियां
म्यूजियम में सभी शैल चित्रों की जानकारी डिजिटल रूप से प्रस्तुत की जाएगी। हाई-क्वालिटी फोटो, वीडियो, ऑडियो गाइड, पुरातत्व विशेषज्ञों की व्याख्या और शोध पत्र उपलब्ध होंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर इन चित्रों को जीवंत बनाया जाएगा, जिससे Visitors को गहरा और यादगार अनुभव मिलेगा।
दूरस्थ गुफाओं तक पहुंच आसान बनेगी
भीमबेटका के सात पहाड़ियों में फैले 750 शैलाश्रय 10 किलोमीटर के दायरे में हैं। फिलहाल केवल एक क्लस्टर ही पर्यटकों के लिए खुला है, जहां ऑडिटोरियम केव और जू रॉक जैसी प्रसिद्ध गुफाएं हैं। बाकी दूरस्थ और जंगली इलाकों में स्थित क्लस्टर तक पहुंच मुश्किल है। नया पार्क इन सभी की सटीक प्रतिकृतियां प्रदर्शित करेगा, ताकि कोई भी पर्यटक पूरे भीमबेटका की झलक एक ही जगह पा सके।







