Jan 10, 2026
आंसुओं से लिखी गुहार... CM डॉ. मोहन यादव ने थामा बैगा बेटी अनामिका का हाथ, डॉक्टर बनने का रास्ता खुला!"
मध्य प्रदेश के सीधी जिले की एक साधारण बैगा आदिवासी परिवार की बेटी अनामिका ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद डॉक्टर बनने का मजबूत इरादा पाल रखा है। आर्थिक तंगी के कारण NEET की तैयारी, कोचिंग और छात्रावास जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थीं। लेकिन उसकी हिम्मत और दृढ़ संकल्प ने मुख्यमंत्री तक उसकी पुकार पहुंचाई, जिसके बाद उसकी जिंदगी में नई उम्मीद की किरण जगी।
सपनों की राह में मुश्किलें
अनामिका बैगा एक गरीब आदिवासी परिवार से हैं। उसके पिता के पास इतने संसाधन नहीं कि बेटी की उच्च शिक्षा का खर्च उठा सकें। उसने विधायक, सांसद और स्थानीय अधिकारियों से मदद मांगी, लेकिन कहीं से कोई सहारा नहीं मिला। रोते हुए उसने अपनी व्यथा व्यक्त की – “मैं बैगा आदिवासी हूं, मुझे डॉक्टर बनना है… मेरे पिता के पास पैसा नहीं है।” यह दर्द सिर्फ उसका नहीं, बल्कि लाखों गरीब आदिवासी बच्चों का प्रतिबिंब है, जो सपनों को हकीकत में बदलने की जद्दोजहद में लगे रहते हैं।
मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई
सीधी दौरे के दौरान अनामिका की यह भावुक गुहार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची। उन्होंने न केवल उसकी बात सुनी, बल्कि तुरंत संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए। NEET की तैयारी के लिए कोचिंग और छात्रावास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही, मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने पर राज्य सरकार हर संभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री का यह भरोसा है कि अनामिका एक दिन कुशल चिकित्सक बनकर प्रदेश का नाम रोशन करेगी।
यह घटना साबित करती है कि संवेदनशील नेतृत्व और सही समय पर उठाया गया कदम कितने बड़े बदलाव ला सकता है। अनामिका की कहानी अब प्रेरणा का स्रोत बन गई है।








