Jan 9, 2026
शैलचित्रों के खोजकर्ता को सलाम: अब ‘डॉ. वाकणकर टाइगर रिजर्व’ कहलाएगा रातापानी
मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को एक नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व — रातापानी — अब महान पुरातत्वविद और भीमबेटका गुफाओं के खोजकर्ता डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम से जाना जाएगा। यह फैसला इतिहास, पर्यावरण और सम्मान—तीनों को जोड़ने वाला माना जा रहा है।
भोपाल से हुआ ऐलान
यह घोषणा भोपाल में आयोजित डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. वाकणकर ने भारतीय इतिहास को वैश्विक पहचान दिलाई और उनके योगदान को स्थायी सम्मान मिलना चाहिए।
शैलचित्रों के पितामह: डॉ. वाकणकर
डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को ‘शैलचित्रों का पितामह’ कहा जाता है। वर्ष 1957 में उन्होंने रायसेन जिले में हजारों साल पुराने भीमबेटका शैलाश्रयों की खोज की थी, जो बाद में 2003 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुए।
इसके अलावा, उज्जैन के कायथा और महेश्वर के पास नवदाटोड़ी जैसे स्थलों पर उत्खनन कर उन्होंने यह सिद्ध किया कि हड़प्पा सभ्यता का विस्तार मध्य भारत तक था।
कहां स्थित है नया ‘डॉ. वाकणकर टाइगर रिजर्व’
रायसेन और सीहोर जिलों में फैला यह टाइगर रिजर्व 1,271.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यह न सिर्फ मध्य प्रदेश का 8वां बल्कि भारत का 57वां टाइगर रिजर्व है, जो जैव विविधता और पर्यटन की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है।
संस्कृति और जंगल का संगम
यह नामकरण मध्य प्रदेश की पहचान को और मजबूत करता है, जहां इतिहास की गहराई और प्रकृति की हरियाली एक साथ सांस लेती है।







