जगदलपुरः प्राथमिक शाला में शिक्षकों की कमी बेहतर शिक्षा के लिए मूल बाधा बनी

जगदलपुरः प्राथमिक शाला में शिक्षकों की कमी बेहतर शिक्षा के लिए मूल बाधा बनी

आशुतोष तिवारी- बस्तर में इस शिक्षा सत्र में भी शिक्षकों की कमी छात्रों के बेहतर शिक्षा के लिए मूल बाधा बनी हुई है। ग्रामीण अंचलों के साथ-साथ शहर में स्थित कंगोली प्राथमिक शाला भी शिक्षकों के कमी से जूझ रहा है। बच्चों की संख्या औसत से अधिक होने के बावजूद यहां शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। शिक्षकों के अभाव में जहां शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। वहीं स्कूल के अन्य कार्यों के संचालन पर भी गुणवत्ता का अभाव देखने को मिल रहा है।

पहली से पांचवी तक के कुल बच्चों की संख्या 59 और शिक्षक एक

शहर के कंगोली में स्थित प्राथमिक शाला की स्थिति दयनीय है। जर्जर हो चुका स्कूल भवन और दर्ज बच्चों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की कमी बच्चों की भविष्य पर रोड़ा बनी हुई है। दरअसल इस स्कूल में पहली से पांचवी तक कक्षाएं लगती हैं औऱ कुल बच्चों की संख्या 59 है। स्कूल के हेड मास्टर का कहना है कि वे बारी-बारी से सभी कक्षा का संचालन करते हैं। ऐसे में स्पष्ट समस्या देखने को मिलती है कि एक कक्षा के संचालन के दौरान बाकि कक्षाएं खाली रहती हैं। बच्चों को संभालना मुश्किल होता है और बच्चे इधर-उधर भागने लगते हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ बाकी स्कूल के काम भी पूरे नहीं हो पाते हैं। कई बार जिले के शिक्षा अधिकारी को लिखित में आवेदन देकर शिक्षक की मांग करने के बावजूद अब तक किसी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इधर शिक्षकों की कमी से बच्चों ने भी बताया कि उनकी पढाई आधी अधूरी होती है। हेड मास्टर द्वारा एक क्लास लिया जाता है और बाकी विषयों पर पढाई नहीं हो पाती है।

शिक्षकों की कमी के साथ जर्जर भवन और परिसर में बॉउंड्रीवॉल का भी अभाव

शिक्षा विभाग के नियम के अनुसार 30 विद्यार्थियों में एक शिक्षक और 60 विद्यार्थियों में 2 शिक्षक हो सकते हैं। दोनों ही शिक्षकों को पांचों कक्षाओं को देखना पड़ता है, लेकिन जिले के ऐसे दर्जनों प्राथमिक शालाएं हैं जहां एक शिक्षक के भरोसे स्कूल संचालित की जा रही है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कंगोली क्षेत्र के वार्ड पार्षद का कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की कमी के साथ जर्जर भवन और परिसर में बॉउंड्रीवॉल का भी अभाव है। ऐसे में वे जल्द जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी को इस समस्या से अवगत कराकर समस्या के निराकरण की मांग करेंगे। इधर इस मामले में जिले के शिक्षा अधिकारी बाहर होने का हवाला देते हुए कुछ भी कहने से बच रहे हैं।


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