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राष्ट्रपति के हाथो कलाकार दीपक विराट को संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जाएगा

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Jun 30, 2018

29 अक्टूबर 1959 को दुर्ग जिले के ग्राम मोहलाई में जन्मे दीपक तिवारी को रंगमंच ने दीपक विराट का नाम दिया कला और संगीत को अपना जीवन समर्पित करने वाले राजनांदगांव की माटी के दीपक ने देश विदेश के मंच पर अपनी कला के खूब जलवे बिखेरे मशहूर नाट्य सम्राट हबीब तनवीर के नया थियेटर से जुड़कर उन्होंने चोर चरणदास चोर, आगरा बाजार, देख रहे नैन, जमादारीन, बहादुर कलारिन, गांव का नाव, ससुराल, मिट्टी की गाड़ी, साजापुर की शांति बाई सहित कई अनगीनत नाटकों में अपनी अभिनय का लोहा मनवाने वाला दीपक विराट आज शरीर से कमजोर हो चुके हैं लकवे की बीमारी से ग्रस्त दीपक तिवारी का परिवार कला के लिए समर्पित है उनकी पत्नी पूनम विराट और उनके बच्चे आज भी संगीत और कला के मंच पर छत्तीसगढ़ की मांटी की खूश्बू बिखेर रहे हैं। 

कभी कला और संगीत के मंच पर तेजी से बढ़ता हुआ दीपक विराट आज अपने बल पर दो कमद भी नहीं चल सकता दीपक विराट का परिवार आज मुफ्लिसी के दिन गुजार रहा है छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा उनकी पत्नी को दाउ मंदराजी सम्मान और दीपक विराट को छत्तीसगढ़ रत्न का खिताब दिया गया है लेकिन बेटे के लिए सरकारी नौकरी की आस अब भी बंधी हुई है।  

वर्ष 2017 के संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार के लिए दीपक विराट का चयन हुआ है दीपक विराट छत्तीसगढ़ के अनेक नाट्य निर्देशकों के साथ काम करने के बाद वर्ष 1984 में प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर के संपर्क में आये और उनके थियेटर से जुड़ गए इसके बाद उन्होंने कई प्रसिद्ध नाटकों में अभियन किया उनके इस अभियन की वजह से ही आज अभाव के बीच उन्हें ये सम्मान दिया जा रहा है।