महिलाओ और छात्राओं  के लिए पिंक लायसेंस की सुविधा अब ठन्डे  बस्ते में

महिलाओ और छात्राओं  के लिए पिंक लायसेंस की सुविधा अब ठन्डे  बस्ते में

इंदौर में पिंक लायसेंस बनाने के लिए जिला प्रशासन और आरटीओ ने  अभी कोई भी केम्प लगवाने का मन नहीं बनाया है जिसके कारण जिले के महिलाओ एवं छात्राओं को मजबूरन सामान्य लायसेंस बनवाना पड़ रहा है साथ ही इसके लिए भी फीस के अलवा दलालो को भी कमीशन देना पड़  रहा है इंदौर आरटीओ के अधिकारी से जब पिंक लायसेंस के बार में बात की तो उन्होंने कहा की ये सरकार को योजना थी और घर घर जाकर लायसेंस बनाना हमारा काम नहीं है ना हमारे पास आमला है साथ ही उन्होंने यह कह दिया की यह केंम्प  नियमित रूप  से लगाना हमारे लिए संभव नहीं है ना ही अलग अलग मोहल्लो में जाकर इस लायसेंस को बनाना हमारा काम  नहीं है।

इंदौर के कलेक्टर निशांत वरवड़े से इस  बारे में  2 जुलाई को सवाल किया था तो उन्होंने इसको चेक करवाने की बात कही साथ ही भष्टाचार के मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर  शिकायत  करने की बात की आरटीओ पिंक लायसेंस के लिए कितनी रूचि ले रहा है साथ ही जिला प्रशासन कितना सक्रिय है  क्यों की पिंक लायसेंस के लिए आखरी केम्प मार्च महीने में महू में लगा था। 

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के द्धारा दिए गए बयान से यही लगता है  पिंक लायसेंस की योजना भी ठन्डे बस्ते में चली गयी है क्योकि  वही जिला प्रशासन की लापरवाही और आरटीओ के इस रवैये के कारन छात्राओं और महिलाओ को मजबूरन पैसे देकर सामान्य लायसेंस बनवाना पड़ रहा है क्योकि आरटीओ और ट्रेफिक पुलिस को चालान काटकर जेब जो भरनी होती है वही  अभी तक इंदौर में  मात्र 4000 पिंक लायसेंस ही बन पाए है।

 


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