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मध्य प्रदेश बजट सत्र 2026: विकास की नई उड़ान, 19 दिनों में बनेगा राज्य का भविष्य

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Jan 15, 2026

मध्य प्रदेश बजट सत्र 2026: विकास की नई उड़ान, 19 दिनों में बनेगा राज्य का भविष्य

 मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 2026 राज्य की आर्थिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह सत्र डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के लिए न केवल वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने का अवसर है, बल्कि पिछले वर्षों की उपलब्धियों को मजबूत करने और नई योजनाओं के माध्यम से जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का मंच भी है। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह सत्र 16 फरवरी 2026 से शुरू होकर 6 मार्च 2026 तक कुल 19 दिनों तक चलेगा, जिसमें 12 महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरान राज्यपाल का अभिभाषण, बजट प्रस्तुति, अनुदान मांगों पर चर्चा और विभिन्न विधेयकों पर बहस होगी। पिछले बजट में 4.21 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, और इस बार भी बड़े ऐलान की उम्मीद है, खासकर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण विकास पर फोकस के साथ। यह सत्र विपक्ष के लिए भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और बहस का मौका प्रदान करेगा।

 सत्र की तारीखें और संरचना

विधानसभा का यह बजट सत्र 16 फरवरी 2026 को प्रारंभ होगा, जब राज्यपाल का अभिभाषण होगा। सत्र की समाप्ति 6 मार्च 2026 को प्रस्तावित है। कुल 19 दिनों की अवधि में केवल 12 बैठकें होंगी, जिसका मतलब है कि बीच-बीच में कुछ अवकाश भी रहेंगे। यह व्यवस्था विधायकों को गहन चर्चा, समितियों की बैठकें और जनता से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए पर्याप्त समय देगी। सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे से होगी, और यह 16वीं विधानसभा का महत्वपूर्ण सत्र माना जा रहा है।

बजट पेश करने की प्रक्रिया और महत्व

इस सत्र का मुख्य आकर्षण वित्तीय वर्ष 2026-27 का राज्य बजट होगा, जो वित्त मंत्री द्वारा पेश किया जाएगा। बजट में राज्य की आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा होगा, साथ ही नई योजनाओं, कर सुधारों और विकास परियोजनाओं की घोषणाएं होंगी। पिछले वर्ष के बजट में कुल 4.21 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें पूंजीगत व्यय पर विशेष ध्यान दिया गया। इस बार भी इसी दिशा में निरंतरता बनी रहेगी, और राज्य की जीएसडीपी को बढ़ाने के लक्ष्य के साथ बड़े निवेश की उम्मीद है। बजट पेश होने के बाद अनुदान मांगों (Demand for Grants) पर विस्तृत चर्चा होगी, जहां प्रत्येक विभाग के बजट पर विधायकों द्वारा सवाल-जवाब और संशोधन प्रस्तावित किए जा सकेंगे।

प्रमुख फोकस क्षेत्र: कृषि और किसान कल्याण

मध्य प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए बजट में कृषि क्षेत्र पर विशेष जोर रहेगा। सरकार ने 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किया है, जिसमें किसानों की आय बढ़ाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने, जल और मिट्टी प्रबंधन जैसी योजनाएं शामिल हैं। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, 'प्रति बूंद अधिक फसल' जैसी योजनाओं का उन्नयन और युवाओं को कृषि से जोड़ने पर फोकस होगा। किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं में बढ़ोतरी और नई तकनीकों का उपयोग अपेक्षित है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा सशक्तिकरण

शिक्षा क्षेत्र में नए संस्थानों की स्थापना, जैसे प्रत्येक संभाग में तकनीकी संस्थान, और छात्रवृत्ति योजनाओं पर जोर रहेगा। स्वास्थ्य में आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं प्रमुख होंगी। युवा सशक्तिकरण के लिए रोजगार सृजन, स्किल डेवलपमेंट और स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाली घोषणाएं संभावित हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास

इंफ्रास्ट्रक्चर पर पूंजीगत व्यय बढ़ाने की नीति जारी रहेगी। सड़कें, पुल, रेल और शहरी विकास परियोजनाएं प्रमुख रहेंगी। राज्य 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य में योगदान देने के लिए तैयार है, जिसमें जीएसडीपी को तेजी से बढ़ाना शामिल है। पिछले बजट में पूंजीगत व्यय रिकॉर्ड स्तर पर था, और इस बार भी इसी ट्रेंड की उम्मीद है।

राजनीतिक महत्व और विपक्ष की भूमिका

यह सत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण भी है। विपक्ष सरकार की नीतियों, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों पर सवाल उठा सकता है। बहस के दौरान स्थगन प्रस्ताव और ध्यानाकर्षण नोटिस भी आ सकते हैं। कुल मिलाकर, यह सत्र राज्य की प्रगति का आकलन करने और भविष्य की रूपरेखा तय करने का अवसर है।

 

Report By:
Monika