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उत्तराखंड में जल्द हो सकता है समान नागरिक संहिता लागू, सरकार ले सकती है जनता से सुझाव

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Aug 30, 2022

उत्तराखंड में जल्द ही समान नागरिक संहिता लागू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि प्रदेश में  दो महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। साथ ही जल्द इसके लिए कमेटी लोगों से बात करेगी और जनता से सुझाव लेगी। मीडिया से बात करते हुए धामी ने कहा कि 'उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू करना हमारा संकल्प है। यह केवल हमारा चुनावी मुद्दा नहीं था हमारा जनता के सामने संकल्प था। हमने जो संकल्प लिया था, उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।'

जल्द सार्वजनिक होगा प्रारूप
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कॉमन सिविल कोड को लेकर गठित कमेटी अपना काम बखूबी कर रही है। इस काम को लेकर पिछले कई दिनों से कमेटी की लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमे ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार जल्द ही इसका प्रारूप सार्वजनिक करेगी।

विपक्ष ने साधा था भाजपा पर निशाना
इस कानून को लागू करने को लेकर विपक्ष ने चुनावों के दौरान जमकर निशाना साधा था। कानून को लेकर हो रहे आलोचनाओं के बीच सीएम धामी ने कहा था कि इससे दिक्कत उनको हो रही है, जो तुष्टिकरण पर काम करते रहे हैं। हम किसी के दबाव में नहीं आएंगे। बता दें कि उत्तराखंड चुनाव 2022 के पहले भारतीय जनता पार्टी की ओर से सरकार बनने की दिशा में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने की घोषणा की गई थी। सीएम पुष्कर सिंह धामी की इस घोषणा के बाद प्रदेश की 70 में से 47 विधानसभा सीटों पर पार्टी को जीत हासिल हुई थी।

क्या है समान नागरिक संहिता
समान नागरिक संहिता पूरे देश के लिए एक समान कानून होने की बात कहता है। साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने आदि कानूनों में भी एक जैसी स्थिति प्रदान करती है। इसका पालन धर्म से परे सभी के लिए जरूरी होता है।

चुनाव के दौरान किया था वादा
धामी ने विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से वादा किया था कि भाजपा सरकार आने पर वो उत्तराखंड में कॉमन सिविल कोड लागू करेंगे। जिसके बाद 23 मार्च को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
स्वतंत्रता के बाद उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू किया जाएगा। हालांकि, गोवा में भी यह कानून जल्द ही लागू हो सकता है। स्वतंत्रता से पहले यह कानून गोवा में लागू था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया था।