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गणेश चतुर्थी 2022: भारत में नहीं गणेश भगवान की सबसे ऊंची मूर्ति, 4 साल में तैयार हुई प्रतिमा

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Aug 30, 2022

हिंदू धर्म के मुताबिक, गणपति सभी देवताओं में पूजनीय होते हैं। वैसे तो किसी भी त्योहार या पूजा के मौके पर सबसे पहले भगवान श्री गणेश को ही याद किया जाता है, पर गणेश चतुर्थी का दिन कुछ खास है। आज के दिन विघ्नहर्ता का जन्म हुआ था। ये पर्व 10 दिन का होता है। कोरोना काल के समय पिछले 2 सालों से ये त्योहार धूमधाम से नहीं मनाया जा सका। पर इस साल गणेश चौथ की धूम हर जगह देखने को मिल रही है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे विश्व में भगवान गणेश की सबसे ऊंची प्रतिमा के बारे में। आपको ये सुनकर बेहद आश्चर्य होगा कि बप्पा की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं बल्कि विदेश में है। दुनिया की सबसे बड़ी भगवान गणेश की मूर्ति थाईलैंड के ख्लोंग क्वांग में स्थित है। इस शहर में गणेश इंटरनेशनल पार्क बनाया गया है, यहां भगवान गणेश की 39 मीटर ऊंची कांस्य प्रतिमा है। ये मूर्ति वहां के प्रख्यात मूर्तिविद 'पिटक चर्लेमलाओ' की उत्कृष्ट कारीगरी का नमूना है। 

4 सालों में तैयार हुई प्रतिमा
थाईलैंड में स्थित भगवान गणेश की इस मूर्ति के सिर पर एक कमल का फूल है, जिसमें ओम लिखा हुआ है। ये मूर्ति कांस्य के 854 विभिन्न भागों से बनी है। इस मूर्ति समेत पूरे पार्क को बनाने में 4 साल का समय लगा। साल 2008 से इस पार्क का निर्माण शुरु हुआ था, जो 2012 में जाकर पूरा हुआ। थाईलैंड में जिन फलों को पवित्र माना जाता है, उन्हें भी भगवान गणेश के हाथों में रखा गया है। इनमें कटहल, आम, गन्ना, और केला शामिल हैं। उनके पेट पर एक सांप लपेटा हुआ है, सूंड में एक लड्डू है और पैरों में चूहा बैठा है। हाथों पर ब्रेसलेट और पैरों का आभूषण बुद्धिमत्ता की निशानी है। थाइलैंड में गणेशजी की मान्यता ज्ञान और बुद्धिमत्ता के देवता के तौर होती है। 

किसने बनवाई मूर्ति?
थाईलैंड के अयुथ्या साम्राज्य के तहत, 1549 में चाचोएंगशाओ शहर बसाया गया था। यहां चाचोएंगशाओ एसोशिएयन नाम से एक संस्था है जो तरह तरह के धार्मिक कार्य कराने के लिए जानी जाती है। एसोशिएशन के प्रेसीडेंट पोल जेन समाचाई वानीशेनी ने तय किया था कि वो एक इंटरनेशनल भगवान की मूर्ति वहां बनाना चाहते हैं। सभी ने भगवान गणेश के नाम पर सहमति जताई। एसोशिएशन प्रेसीडेंट ने तय किया कि विश्व की सबसे ऊंची गणेश की मूर्ति यहां लगाई जाएगी। उसके बाद पास के ख्लॉन्ग ख्वेन शहर में 40,000 वर्ग मीटर की ये जगह तलाशी गई। यहां की मिट्टी उपजाऊ है होने के कारण ये जगह भगवान की मूर्ति की स्थापना के लिए चुनी गई। पहले यहां एक इंटरनेशनल गणेश पार्क बनाया गया, फिर उसमें ये मूर्ति लगाई गई।