Oct 9, 2018
गब्बर सिंह ठाकुर - प्राचीनकाल से इस कंकाली मंदिर मे माँ काली अपना रुद्र रुप धारण किये हुये है भगवान शिव के सीने पर अपना पैर रखे हुये ये और नरमुंड की माला पहने हुये है येसा माना जाता है की कंकाली यही प्रगट हुई थी और नवरात्रि के बाद मश्वमी के दिन माँ कंकाली कुछ समय के लिये अपनी गर्द को सीधा करती है और अपने भक्तों को दर्शन देती है और भक्तों की मनो कामनाऐं पूरी करती है। मान्यता है कि जिस भी भक्त को माता की सीधी गर्दन देखने का मौका मिलता है उसके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं।
नवरात्र में होती है विशेष पूजा
राजधानी भोपाल से महज 20 किमी दूर रायसेन जिले के गुदावल गांव में मां कंकाली का प्रचीन मंदिर है यहां माँ कंकाली की 20 भुजाओं वाली प्रतिमा के साथ भगवान ब्रम्हा, विष्णु और महेश की प्रतिमाएं विराजमान है आमतौर पर यहां पूरे साल माता के भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के बाद वियजदशमी पर श्रद्धालुओं का तांता लगता है। चैत्र नवरात्र में रामनवमी के दिन विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है।
माँ कंकाली भक्तो की मनोकामनाऐं करती है पूरी
बताया जाता है कि इस दिन माता की लगभग 45 डिग्री झुगी गदरन कुछ पलों के लिए सीधी होती है जिसे देखने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं मंदिर के पुजारी भुवनेश्वर शास्त्री बताते हैं कि मंदिर से जुड़ी अलग-अलग मान्यताएं हैं कहा जाता है कि जिन माता-बहनों की गोद सूनी होती है, वह श्रृद्धाभाव से यहां गोबर से उल्टे हाथ मंदिर के पीछे लगाती हैं उनकी मान्यता अवश्य पूरी होती है। और सबसे खास बात यह है की मॉ कंकाली का जो स्थान है या यू कहे मंदिर है वह जंगल के बीचो बीच बना हुआ है। मंदिर के चारो लगे हरे-भरे पेड़ पौधे यहां सबसे बड़ा आकर्षण है।








