Nov 21, 2025
गिद्ध मारीच की महायात्रा: 15,000 किमी पार कर चार देश घूमकर भारत लौटा
मध्य प्रदेश के जंगलों से निकला एक गिद्ध ‘मारीच’ ने 8 महीने में 15,000 किलोमीटर से अधिक का अद्भुत सफर पूरा कर वापस अपने घर लौट आया है। सौर ऊर्जा से चलने वाले जीपीएस ट्रांसमीटर की मदद से इसकी हर गतिविधि पर नजर रखी गई। यह गिद्ध पाकिस्तान, अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे देशों में गया और सुरक्षित भारत लौट आया।
घायल अवस्था से नई उड़ान
मार्च 2025 में विदिशा-रायसेन जिले की सीमा पर हलाली डैम के पास यह गिद्ध गंभीर रूप से घायल मिला था। वन विभाग की टीम ने इसका लंबा इलाज किया। स्थानीय लोगों ने इसका नाम रामायण के पात्र मारीच के नाम पर रखा। स्वस्थ होने के बाद इसके पंख पर सौर सेल वाला हल्का जीपीएस ट्रांसमीटर लगाकर इसे फिर से आसमान की आजादी दी गई।
चार देशों का रोमांचक सफर
रिहा होने के कुछ दिनों बाद ही मारीच ने पश्चिम की ओर उड़ान भरी। यह पहले पाकिस्तान पहुंचा, फिर अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में गया। उसके बाद उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान के विशाल मैदानों में भोजन की तलाश करता रहा। जीपीएस डेटा के अनुसार इसने कभी-कभी एक दिन में 300 किलोमीटर से ज्यादा की उड़ान भरी।
प्रकृति की अद्भुत नेविगेशन क्षमता
विशेषज्ञों के अनुसार गिद्ध मौसम, हवा की दिशा और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग कर हजारों किलोमीटर तक सटीक दिशा पता कर लेते हैं। मारीच ने बिना किसी मानचित्र के चार देशों की सीमाएं पार कीं और फिर ठीक उसी क्षेत्र में लौट आया जहां से इसे छोड़ा गया था।
संरक्षण की नई उम्मीद
मारीच की सफल वापसी ने गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम को नई ताकत दी है। यह साबित करता है कि उचित इलाज और ट्रैकिंग के साथ गिद्धों को फिर से जंगलों में बसाया जा सकता है। वन विभाग अब अन्य घायल गिद्धों पर भी इसी तकनीक का उपयोग करने की योजना बना रहा है।
भविष्य की निगरानी जारी
फिलहाल मारीच फिर से मध्य प्रदेश के आसमान में चक्कर लगा रहा है। इसका जीपीएस ट्रांसमीटर अभी भी सक्रिय है और हर घंटे लोकेशन भेज रहा है। यह जीवित प्रमाण है कि भारतीय गिद्ध अभी भी लंबी दूरी की उड़ान भरने में सक्षम हैं।








