52 गांवो के लिए पुल निर्माण आज भी एक सपने की तरह, कोटरी नदी बनी मुसीबत

52 गांवो के लिए पुल निर्माण आज भी एक सपने की तरह, कोटरी नदी बनी मुसीबत

जिले के  दुर्गुकोंदल ब्लॉक से महज 15 किलोमीटर दूर सुरूंगदोह व कोडेकुर्से गांव मार्ग पर कोटरी नदी जिस पर आज़ादी के बाद से पुल निर्माण 52 गावो के लोगो के लिए सपना ही बना हुआ है इस बीच पीढ़ियां बदल गई लेकिन अगर नही बदली तो इन 52 गांवों के लोगो की किस्मत जिन्हें आज भी बारिश के मौसम में आदिकाल की तरह जीवन जीना पड़ता है बारिश के दौरान कोटरी नदी अपने चरम पर रहती है और इस उफनती नदी को पार करना जान से खिलवाड़ करने जैसा होता है। 

प्रशासन का रवैया हैरान करने वाला

कोटरी नदी पर पूल निर्माण को लेकर जिला प्रशासन और राजनेताओं की उदासीनता के चलते बारिश के मौसम में इस नदी के उस पार के 52 गांव के निवासी स्वास्थ्य शिक्षा के साथ साथ आपातकालीन सेवाओ से वंचित हो जाते है और बारिश के मौसम में यदि किसी को गंभीर बीमारी हो जाये या कुछ घटना घट जाए तो उसे जिला मुख्यालय तक ला पाना असंभव हो जाता है और इसके अभाव में 70 सालो में नॉ जाने कितने परिवारों ने अपनो को खो दिया  लेकिन  इसके बाद भी अब तक इस नदी पर पुल निर्माण को लेकर जिला प्रशासन का रवैया हैरान करने वाला नज़र आता है।

विपक्षी नेताओं ने धरना दिया 

पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों के समर्थन में समय समय पर राजनितिक पार्टियों के द्वारा आन्दोलन भी किया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई वहीँ भाजपा की सरकार 14 वर्षों से अपने कार्यकाल के दौरान किये गए विकास कार्यों को लेकर जगह-जगह आमसभा, रैली के माध्यम से जनता को लुभाने में लगी रहती है  पर इस क्षेत्र में पहुंचकर देखे तो वास्तविकता कुछ और ही बया कर रही है।

जल सत्याग्रह भी किया 

अंदरूनी  क्षेत्रों में मुलभूत सुविधाओं से आज भी आम लोग वंचित है और स्वयं मुख्यमंत्री के द्वारा पिछले वर्ष लोकसुराज अभियान के दौरान दुर्गुकोंदल प्रवास पर पुल का सिलान्यास किया गया था दूसरी बार विकास यात्रा के दौरान भी पुल जल्द ही बनवाने का आश्वासन दिया गया लेकिन पुल नहीं बन पाने के कारण क्षेत्र के लोगों को आज भी उन्ही तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है जो तकलीफे उनके बुजुर्गों ने भी सही थी।

 

 


Share
Bulletin