देवभोग की धाकड़ छोरियों ने किया बड़ा कारनामा भरी “हौसलों की उड़ान”

देवभोग की धाकड़ छोरियों ने किया बड़ा कारनामा भरी “हौसलों की उड़ान”

पुरुषोत्तम पात्रा - पटाखे आतिशबाजी और इंतजार करती भीड ये किसी वीआईपी नेता के आने से पहले का माहौल नही है बल्कि गरियाबंद जिले के ग्रामीण अंचल देवभोग की छोरियों के स्वागत के लिेए किया गया इंतजाम है हो भी क्यों ना मुंबई से अंतर्राष्ट्रीय कराते प्रतियोगिया में यहॉ की तीन छोरियां गोल्ड मेडल लेकर वापिस जो लौटी रही है मीनाक्षी तो पिछले साल भी गोल्ड जीत चुकी है सबसे बडी बात तो ये है कि ये तीनों छोरियां कस्तुरबा गांधी आश्रम की छात्राएं है और बहुत सीमित संसाधनों में इन छात्राओं ने ये उपलब्धी हासिल की है।

कहा बच्चियों को आगे बढने के अवसर उपलब्ध कराया जाये

इसके बावजूद भी जब इन छोरियों से इनकी प्रैक्टिस में आने वाली दिक्कतों के बारे में पुछा गया तो उस सवाल को टालकर जवाब ये दिया कि मन में गोल्ड मैडल लाने का ठान लिया था बस उसके बाद सबकुछ भूल गये अपनी सुविधाओं को बोना साबित करके जिस तरह इन छोरियों ने अपने टारगेट को महत्व दिया उसी तरह इनकी आश्रम अधीक्षिका और कोच ने सुविधाओं को तव्वजो नही दी कोच बरखा राजपूत और आश्रम अधीक्षिका अनिता मेढे से जब पूछा गया कि आप शासन से क्या मांगना चाहती है तो दोनो ने एक ही स्वर में कहा कि बच्चियों को आगे बढने के अवसर उपलब्ध कराया जाये।

परिजनों ने पहले किया था इंकार

पालक पहले अपनी बेटियों को टुर्मानेंट में भेजने को तैयार नही थे अब उन्हीं पालको की पहचान इन बेटियों से हो रही है और वे पालक बेटियों की सफलता पर खुशी के आशु बहा रहे है वहीं स्थानीय नेता भी बेटियों को देवभोग का गौरव बताते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिला रहे है काहा जाता है कि भारत के हर गॉव की धूल में प्रतिभाएं छिपी पडी है जरुरत है बस उन प्रतिभाओं को निखारकर सामने लाने की देवभोग की इन धाकड छोरियों को भी यदि खेल के बेहतरहर अवसर उपलब्ध हो जाये तो वो दिन दूर नही जब ये छोरियां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना और अपने देश का नाम रोशन करती नजर आयेगी।

 


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