Loading...
अभी-अभी:

इदौर के व्यवसायी ने महात्मा गांधी को दिया था विशेष घड़ी

image

Oct 2, 2016

इंदौर। महात्मा गांधी का इतिहास मप्र के उद्योग नगरी इंदौर के एक व्यवसायी से भी जुड़ा हुआ है। ये व्यवसायी पेश से घड़ी बनाने का काम करते थे और इसी कस्तूरे परिवार ने बापू को उपहार स्वरूप में घड़ी भेंट की थी। यह ही वो परिवार था जिसने उस घड़ी का निर्माण किया था जो बापू के पास उनकी आखिरी सांस तक मौजूद थी। स्वर्गीय एमएम कस्तूरे के बेटे ने बताया कि उनके पिता को घड़ी बनाने में महारत हासिल थी। उन्होंने इंदौर में 'उद्यम' नाम से घड़ियां बनाने का कारखाना शुरू किया था। 1935 में जब बापू मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति द्वारा आयोजित हिंदी सम्मेलन में भाग लेने इंदौर आए थे तब उनके पिता ने उनके द्वारा हाथ से बनाई गई घड़ी दिखाई थी जो गांधी जी को बेहद पसंद आई थी।
गुम होने की खबर पर बापू के लिए बनाई विशेष घड़ी
सन् 1947 में एमएम कस्तूरे को यह खबर मिली की पटना से लौटते वक्त बापू की घड़ी गुम हो गई है। यह पता चलते ही उन्होंने गांधी जी को इंदौर से दिल्ली टेलीग्राम कर अपने ट्रेडमार्क उद्यम की घड़ी उन्हें भेंट करने की इच्छा जाहिर की।जिसके बाद उन्होंने गांधी जी के लिए विशेष तौर पर हाथ से जेब घड़ी बनाना शुरू कर दिया। घड़ी का काम पूरा होते ही 11 जून 1947 को उन्होंने चांदी के केस में जेब घड़ी और एक हस्तनिर्मित टेबल घड़ी बापू को भेंट की। हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन करने वाले बापू के लिए इस घड़ी के अंक भी हिंदी में रखे गए थे। बापू की शहादत के दिन 30 जनवरी 1948 तक यही घड़ी उनके पास थी।