Oct 4, 2016
बीसीसीआई के बैंक खाते फ्रीज करने के निर्देश पर जस्टिस आरएम लोढ़ा प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि मैच, खेल गतिविधियां और प्रशासनिक कार्यों के लिए पैसा खर्च करने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। भारत-न्यूजीलैंड सीरीज पर संकट के बादल मंडराने के मामले पर जस्टिस आरएम लोढ़ा ने कहा कि मैच या सीरीज रद्द होने का सवाल ही नहीं है। बीसीसीआई के खाते फ्रीज करने के मामले पर जस्टिस आरएम लोढ़ा ने कहा कि हमने बोर्ड से राज्य एसोसिएशन को अधिक फंड देने से मना किया था। जस्टिस आरएम लोढ़ा ने कहा कि मैंने बीसीसीआई को रोजमर्रा के कामों के लिए फंड बंद करने के लिए नहीं कहा था. हमने बैंकों से सिर्फ राज्य क्रिकेट बोर्डों को धन न देने के लिए कहा है।
दरअसल, अपनी सिफारिशों का उल्लंघन किए जाने से लोढ़ा कमेटी काफी नाराज है। कमेटी को पता चला है कि बीसीसीआई की 30 सितंबर 2016 को हुई आपात कार्यकारी बैठक में कुछ फैसले लिए गए हैं। इसमें विभिन्न सदस्य संघों को काफी बड़ी रकम का वितरण किया गया है। लोढ़ा कमेटी ने इसी बात से खफा होकर बीसीसीआई सचिव अजय शिर्के, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जोहरी और कोषाध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी को एक पत्र भेजा है. पत्र की एक कॉपी बीसीसीआई के खातों का संचालन करने वाली बैंकों को भी भेजी गई हैं.
एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, लोढ़ा कमेटी से मिले पत्र के बाद यस बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने बीसीसीआई के खातों को फ्रीज कर दिया है। एक अन्य अंग्रेजी अखबार ने बीसीसीआई के एक सीनियर पदाधिकारी के हवाले से लिखा है, बैंक खाते फ्रीज होने के बाद हमारे सामने सीरीज को निरस्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. हम भारत को पूरी दुनिया के सामने अपमानित होते नहीं देखना चाहते है. हमारा कामकाज कैसे चलेगा? अब हम किसी मैच का आयोजन कैसे करेंगे? भुगतान कौन करेगा? अकाउंट फ्रीज होना कोई मजाक नहीं है. एक इंटरनेशनल टीम दौरे पर है और काफी कुछ दांव पर लगा हुआ हैं.'
लोढ़ा कमेटी का बैंकों को लिखा पत्र
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित जस्टिस आरएम लोढ़ा पैनल ने बीसीसीआई का अकाउंट रखने वाले बैंकों को कहा है कि कि वे बोर्ड की 30 सितंबर को हुई विशेष आम बैठक में लिए गए वित्तीय फैसलों के संबंध में किसी भी रकम का भुगतान नहीं करे. अपनी सिफारिशों का उल्लघंन किए जाने से लोढ़ा पैनल काफी नाराज बताया जा रहा है. कमेटी ने कहा कि आप जानते हैं कि समिति के 31 अगस्त 2016 को दिए गए निर्देश के अनुसार रूटीन के मामलों के अलावा भविष्य से संबंधित कोई भी फैसले नहीं लिए जा सकते. इस तरह की रकम का भुगतान करना रूटीन काम नहीं है. वैसे भी इसकी कोई आकस्मिक जरूरत नहीं थी. आप यह भी जानते हैं कि बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले और साथ ही इस पैनल में तय की गई पहली समयसीमा का उल्लघंन किया है. उसमें फंड के वितरण की नीति 30 सितंबर 2016 तक गठित किया जाना भी शामिल है. कमेटी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट 6 अक्टूबर (गुरुवार) को स्टेटस रिपोर्ट की सुनवाई करेगी. इसलिए 31 अगस्त के बाद बीसीसीआई की ओर से मंजूर या जारी किए गए किसी भी वित्तीय रकम के वितरण के लिए कदम नहीं उठाने का निर्देश दिया जाता है. इस निर्देश में किसी भी तरह का उल्लघंन होने पर उसकी जानकारी को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जाएगा।








