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swaraj exclusive: पात्रा चॉल घोटाले में पूछताछ के बाद ED ने देर रात शिवसेना सांसद संजय राउत को गिरफ्तार कर लिया, जाने ED से जुड़ी हर खबर, ED क्या है? कैसे काम करती है, ED का इतिहास क्या है?

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Aug 1, 2022

महाराष्ट्र के पात्रा चॉल घोटाले में आरोपी शिवसेना सांसद संजय राउत की 11.30 बजे PMLA कोर्ट में पेशी होगी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में देर रात 12 बजे गिरफ्तार किया था। बुधवार को साढ़े छह घंटे की पूछताछ के बाद ED की ओर से यह एक्शन लिया गया। राउत रविवार को शाम 5.30 बजे ED दफ्तर पहुंचे थे। राउत की गिरफ्तारी के बाद उनके भाई सुनील राउत ने कहा कि गलत तरीके से उन्हें गिरफ्तार किया गया है। हमें गिरफ्तारी के संबंध में कोई कागज नहीं दिया गया है। भाजपा संजय राउत से डरती है, इसलिए गिरफ्तारी करवाई गई है।

ED क्या है?
ED का फुल फॉर्म Enforcement Directorate या Directorate General of Economic Enforcement है। हिंदी में ईडी का फुल फॉर्म प्रवर्तन निदेशालय या आर्थिक प्रवर्तन महानिदेशालय होता है। ED भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन एक विशेष वित्तीय जांच एजेन्सी है जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। पाँच क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता और दिल्‍ली में है। यह एजेन्सी भारत में विदेशी सम्पत्ति मामला, धन-शोधन(Money Laundering), आय से अधिक संपत्ति की जांच करती है। ED प्रवर्तन निदेशालय (ED) भारत में आर्थिक कानूनों को लागू करने और आर्थिक मामलों से लड़ने के लिए एक कानून प्रवर्तन एजेंसी और आर्थिक खुफिया एजेंसी है। प्रवर्तन निदेशक, इसके प्रमुख है। यह Indian Revenue Service, Indian Corporate Law Service, Indian Police Service और Indian Administrative Service के अधिकारियों से बना है।

ED के कार्य
ईडी फेमा, 1999 के उल्लंघन से संबंधित सूचना को प्राप्त करता है, यह सूचनाएं इसे केंद्रीय और राज्य सूचना अभिकरणों, शिकायतों आदि से प्राप्त होती है |यह “हवाला” फॉरेन एक्सचेंज रैकेटियरिंग, निर्यात प्रक्रियाओं का पूरा न होना, विदेशी विनिमय का गैर प्रत्यावर्तन तथा फेमा, 1999 के तहत उल्लंघन करने पर मामले की जाँच और निर्णय लेता है। न्यायिक निर्णय कार्यवाही के अंतर्गत दंड की वसूली करता है, इसके लिए वह नीलामी इत्यादि प्रक्रिया का अनुपालन करता है। ईडी पूर्ववर्ती फेरा, 1973 के तहत न्याय अभियोजन, अपील न्यायनिर्णयन के मामलों का प्रबंध करता है। प्रवर्तन निदेशालय विदेशी मुद्रा और तस्करी निवारण अधिनियम के संरक्षण (सीओएफईपीओएसए) के अंतर्गत सिफारिश तथा कार्यवाही करता है। यह पीएमएलए अपराध के अपराधी के विरूद्ध सर्वेक्षण, जांच, जब्ती, गिरफ्तारी, अभियोजन कार्य को पूर्ण करता है। ईडी पीएमएलए के अंतर्गत अपराधी के हस्तांतरण के साथ-साथ अपराध की प्रक्रियाओं की जब्ती, कुर्की के संबंध में संविदाकारी राज्य को या से पारस्परिक कानूनी सहायता की मांग करना तथा प्रदान करता है।

भ्रष्टाचार रोकने में भी होती है भुमिका
भारत में भ्रष्टाचार को कम करने में ईडी ( प्रवर्तन निदेशालय ) की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका हैं। यह विशेष एजन्सि अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन करती हैं जिससे मनी शोधन और काले धन से जुड़े गंभीर मामलों में संलिप्त दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच करके उन्हे कानून के अनुसार दण्ड दिलाती हैं।

इतिहास
प्रवर्तन निदेशालय की स्थापना 01 मई, 1956 को हुई थी ,जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम,1947 (फेरा,1947) के अंतर्गत विनिमय नियंत्रण विधियों के उल्लंघन को रोकने के लिए आर्थिक कार्य विभाग के नियंत्रण में एक ‘प्रवर्तन इकाई’ गठित की गई थी। वर्ष 1957 में इस इकाई का ‘प्रवर्तन निदेशालय’ के रूप में पुनः नामकरण कर दिया गया था तथा मद्रास में इसकी एक और शाखा खोली गई।